UP News: प्रयागराज में तीन नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम की पावन रेती पर शनिवार 3 जनवरी से दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक धार्मिक और आध्यात्मिक समागम माघ मेला की शुरुआत हो रही है. 44 दिनों तक चलने वाले इस आस्था के पर्व का पहला पड़ाव पौष पूर्णिमा है. प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने दावा किया है कि पहले स्नान पर्व के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. अनुमान है कि पहले स्नान पर ही करीब 25 से 30 लाख श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे.
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मिनी कुंभ: 800 हेक्टेयर और 7 सेक्टरों में बसी तंबुओं की नगरी
योगी सरकार इस बार के माघ मेले को मिनी कुंभ के भव्य स्वरूप में आयोजित कर रही है. मेला क्षेत्र को कुल 800 हेक्टेयर में फैलाया गया है जिसे व्यवस्थित ढंग से 7 सेक्टरों में विभाजित किया गया है. मेले में 5000 से ज्यादा धार्मिक संस्थाएं और साधु-संतों के शिविर बसाए गए हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग 8 किलोमीटर लंबे स्नान घाट तैयार किए गए हैं. महिलाओं के लिए घाटों पर विशेष 'चेंजिंग रूम' बनाए गए हैं. संगम नोज पर बिजली के खंभों पर नंबरिंग की गई है, ताकि भीड़ में बिछड़ने पर लोग 'खोया-पाया केंद्र' के जरिए अपनों तक पहुंच सकें.
AI कैमरों और ड्रोन से निगरानी
एसपी माघ मेला, नीरज पांडेय के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. मेले की सुरक्षा में 10 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं. पूरे क्षेत्र में 17 पुलिस थाने और 42 चौकियां बनाई गई हैं. 400 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है, जिनमें 200 से अधिक कैमरे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक से लैस हैं. यूपी एटीएस, एसटीएफ, बीडीएस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं. जल सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की फ्लड कंपनियां गोताखोरों के साथ तैनात हैं.
निर्मल गंगा और श्रद्धालुओं का उत्साह
मेलाधिकारी ऋषि राज ने स्वयं घाटों का निरीक्षण कर श्रद्धालुओं से संवाद किया है. उन्होंने सुनिश्चित किया है कि गंगा में स्नान के लिए पर्याप्त और निर्मल जल उपलब्ध रहे. संगम तट पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं ने भी तैयारियों पर संतोष जताया है. भक्तों का कहना है कि गंगा जल न केवल आचमन के योग्य है बल्कि काफी स्वच्छ दिखाई दे रहा है.
कल्पवास का संकल्प: कठिन तप की शुरुआत
पौष पूर्णिमा से ही संगम तट पर कल्पवास की शुरुआत होती है. मान्यता है कि माघ मास में सभी देवी-देवता प्रयागराज में ही वास करते हैं. अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज के अनुसार, कल्पवासी पौष पूर्णिमा पर गंगा पूजन और रेत की पिंडी बनाकर पूजन करते हैं. इसके बाद एक माह के ये कठिन नियम शुरू होते हैं-
- संयमित जीवन: ब्रह्मचर्य का पालन और भूमि पर शयन.
- तीन पहर स्नान: कल्पवासी दिन में तीन बार गंगा स्नान करते हैं.
- सात्विक भोजन: एक समय भोजन और वह भी गुरु को भोग लगाने के बाद.
- अध्यात्म: पूरा दिन रामायण, गीता पाठ और संत समागम में बीतता है.
माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां
आस्था के इस मेले में छह मुख्य स्नान पर्व होंगे:
⦁ 3 जनवरी: पौष पूर्णिमा (प्रथम स्नान)
⦁ 15 जनवरी: मकर संक्रांति
⦁ 18 जनवरी: मौनी अमावस्या
⦁ 23 जनवरी: बसंत पंचमी
⦁ 1 फरवरी: माघी पूर्णिमा
⦁ 15 फरवरी: महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान)
संगम की रेती पर आस्था का यह सैलाब 15 फरवरी तक जारी रहेगा, जहां करोड़ों लोग अपने पापों के शमन की कामना लेकर डुबकी लगाएंगे.
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