लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से लेखपाल भर्ती परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी होते ही प्रतियोगी छात्रों में नई उम्मीद जगी है. बता दें कि नए साल से पहले 9,794 पदों के लिए लेखपाल भर्ती का ऐलान किया गया था. इस भर्ती को लेकर छात्रों में उत्साह तो है.लेकिन इसके साथ ही कुछ अहम मांगें और चिंताएं भी सामने आ रही हैं. इन्हीं मुद्दों को जानने के लिए यूपी Tak की टीम प्रयागराज के सलोरी इलाके में पहुंची जहां बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र रहकर सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं.
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नोटिफिकेशन आने से जगी उम्मीद
रिपोर्टर ने छात्रों से बातचीत करते हुए बताया कि लेखपाल भर्ती परीक्षा का नोटिफिकेशन काफी समय बाद जारी हुआ है और छात्र लंबे समय से इस मौके का इंतजार कर रहे थे. इसी क्रम में प्रतियोगी छात्र रिजभान सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी. रिजभान सिंह ने कहा कि “मैं एक प्रतियोगी छात्र हूं और लेखपाल भर्ती का फॉर्म भरूंगा. कल जो आरक्षण से जुड़ा मुद्दा था, उसे संशोधित करके वैकेंसी जारी की गई है. यह एक अच्छी पहल है और इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं.” उन्होंने आगे PET कटऑफ को लेकर अपनी मांग रखते हुए कहा कि “हम सभी छात्रों की यही उम्मीद है कि जैसे आरक्षण का संशोधन किया गया, वैसे ही अब PET का कटऑफ भी पहले ही जारी कर दिया जाए. इससे जिनके नंबर कम हैं और जिनके ज्यादा हैं सभी को स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. अगर पहले ही कटऑफ तय हो जाए तो उसी आधार पर फॉर्म भरे जाएं, न कि बाद में कटऑफ लगाकर छात्रों को बाहर किया जाए.”
कॉमन कटऑफ की मांग
इसके बाद प्रतियोगी छात्र पंकज पांडे ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि “हम लोग लगातार यह मांग करते आए हैं कि जब भी कोई विज्ञप्ति आए उसमें कोई त्रुटि न हो. छोटी-सी गलती भी भर्ती को कोर्ट-कचहरी में फंसा देती है.” उन्होंने यह भी कहा कि इस बार फॉर्म में जो त्रुटि थी उसे दूर कर दिया गया है जो एक सकारात्मक कदम है. इसके बाद उन्होंने कहा कि “अब हमारी मांग है कि UPSSSC कॉमन कटऑफ लागू करे. CET और PET जैसी परीक्षाओं में परसेंटाइल बेस्ड मिनिमम कटऑफ तय किया जाए ताकि अधिकतम छात्रों को फॉर्म भरने और परीक्षा में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके.”
भर्ती देर से आती है इसलिए मौके सीमित हो जाते हैं
बता दें कि यूपी Tak की टीम से बात-चीत के दौरान एक स्थानीय युवक ने भी छात्रों की ओर से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि “सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद कि भर्ती आई लेकिन कॉमन कटऑफ जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए. जब आरक्षण जैसे जटिल मुद्दे सुलझाए जा सकते हैं तो कॉमन कटऑफ भी लागू किया जा सकता है.” उन्होंने आगे कहा कि इस सत्र में UPSSSC के जरिए अधिकतम भर्तियां आने वाली हैं, इसलिए “मिनिमम कटऑफ और मैक्सिमम अपॉर्चुनिटी का सिद्धांत लागू होना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को मौका मिल सके.”
आर्थिक और मानसिक दबाव की पूरी कहानी
वहां मौजूद एक प्रतियोगी छात्र राहुल गुप्ता ने भर्ती प्रक्रिया में देरी से होने वाली परेशानियों को विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि “हम लोग किराए के कमरों में रहते हैं. घर वाले बड़ी मुश्किल से खर्च भेजते हैं. यहां रहते हुए तीन-चार साल से ज्यादा हो गए हैं.” उन्होंने कहा कि भर्तियां बहुत लंबे अंतराल के बाद आती हैं. “एजीटीए भर्ती का उदाहरण लें तो 2018 में फॉर्म आया और 2021 में उसका रिजल्ट आया था. फिर 2024 में फॉर्म और 2025 में परीक्षा दी. 14 अक्टूबर को रिजल्ट आया लेकिन अभी तक फाइनल रिजल्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं हुआ है.”
राहुल गुप्ता ने आगे बताया कि जब परीक्षाएं ववादों में फंसती हैं तो उसका असर सर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि निजी जीवन पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा कि “कोर्ट-कचहरी के चक्कर में बहुत तकलीफ होती है. शादी की बात आती है तो घर वाले साफ मना कर देते हैं कि अभी लड़का कामयाब नहीं है. सपने टूट जाते हैं और पढ़ाई पर भी असर पड़ता है.”
सरकार से छात्रों की अपील
छात्रों ने एक स्वर में कहा कि वे सरकार के आभारी हैं कि लंबे समय बाद लेखपाल भर्ती का मौका मिला है. अब उनकी अपील है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और त्रुटिरहित हो. साथ ही कॉमन कटऑफ लागू कर अधिकतम अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाए.
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