शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेले में दी गई जमीन, सुविधाएं छीन उन्हें ब्लॉक करने की तैयारी! नोटिस से हड़कंप

Swami Avimukteshwaranand Second Notice: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन का सख्त नोटिस।. मौनी अमावस्या पर बैरियर तोड़ने और बिना अनुमति बग्घी ले जाने का आरोप है. 24 घंटे में जवाब न देने पर मेले से निष्कासन और सुविधाएं छीनने की चेतावनी.

ज्योतिर्मठ मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

हर्ष वर्धन

22 Jan 2026 (अपडेटेड: 22 Jan 2026, 01:09 PM)

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Swami Avimukteshwaranand Second Notice: प्रयागराज में चल रहा माघ मेला विवादों की वजह से चर्चा में है. मेले में ज्योतिर्मठ मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच तनाव अब काफी आगे बढ़ गया है. मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस दिया है जो काफी सख्त है. यह नोटिस मौनी अमावस्या वाले दिन का है जो अब सामने आया है. हमने इस नोटिस को आपको आसान शब्दों में समझाने की कोशिश की है. नीचे खबर में पढ़िए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिले लेटेस्ट नोटिस का तर्जुमा. 

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नियमों का उल्लंघन और बैरियर तोड़ना

नोटिस में प्रशासन ने कहा है कि 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को संगम क्षेत्र में इतनी भारी भीड़ थी कि केवल पैदल चलने की अनुमति थी.  इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना अनुमति के बग्घी (रथ) पर सवार होकर संगम की ओर जाने लगे. उन्होंने पांटून पुल नंबर 2 (जो इमरजेंसी के लिए सुरक्षित था) पर लगा बैरियर तोड़ दिया. पुलिस और प्रशासन बार-बार मना कर रहे थे, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी.

भगदड़ का खतरा पैदा करना

नोटिस के मुताबिक, जहां लाखों लोग स्नान कर रहे थे, वहां बग्घी ले जाने की जिद करने से भगदड़ मच सकती थी. इससे लोगों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था. मना करने पर स्वामी जी और उनके साथियों ने पुलिस से विवाद भी किया.

'शंकराचार्य' नाम के उपयोग पर आपत्ति

प्रशासन ने लिखा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को 'शंकराचार्य' बताते हुए मेले में बोर्ड लगाए हैं. नोटिस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस पद को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, इसलिए यह अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है. 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दी गई ये चेतावनी 

मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे का समय दिया है. उनसे पूछा गया है कि नियम तोड़ने के कारण उनके आश्रम को दी गई जमीन और सभी सरकारी सुविधाएं क्यों न छीन ली जाएं? उन्हें हमेशा के लिए मेले में आने से क्यों न रोक दिया जाए? प्रशासन ने साफ कहा है कि अगर 24 घंटे में जवाब नहीं मिला, तो कार्रवाई कर दी जाएगी.

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