उन्नाव जेल में कैदी शफीक की संदिग्ध मौत से मचा बवाल, परिजनों ने पुलिस पर लगा दिए ये गंभीर आरोप!

Unnao Jail Death: उन्नाव जिला जेल में बंद 45 वर्षीय कैदी शफीक की संदिग्ध मौत के बाद हंगामा मच गया. परिजनों ने जेल प्रशासन और पुलिस पर मारपीट, इलाज न देने और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन ने जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सच्चाई सामने आने की बात कही है.

यूपी तक

• 03:32 PM • 25 Jun 2026

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Unnao Jail Death: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिला जेल में बंद एक कैदी की संदिग्ध मौत ने जेल प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हत्या के प्रयास के एक मामले में जेल भेजे गए 45 वर्षीय शफीक की महज तीन दिन के भीतर मौत हो गई. शफीक की मौत के बाद परिजनों ने जिला अस्पताल के बाहर हंगामा किया, सड़क जाम की और आरोप लगाया कि जेल के अंदर उनके साथ मारपीट की गई, लेकिन हालत बिगड़ने के बावजूद न तो समय पर दवा दी गई और न ही इलाज कराया गया. दूसरी ओर पुलिस और जेल प्रशासन का कहना है कि शफीक की तबीयत अचानक खराब हुई थी, जिसके बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अब पूरे मामले में जांच शुरू कर दी गई है और सभी की नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं.

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उन्नाव जिला जेल में बंद कैदी शफीक की मौत से मचा हड़कंप

उन्नाव जिला जेल में बंद 45 वर्षीय कैदी शफीक की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, शफीक को 21 जून 2026 को हत्या की कोशिश से जुड़े एक मामले में जेल भेजा गया था. लेकिन जेल जाने के महज तीन दिन के भीतर ही उसकी मौत हो गई. जैसे ही परिवार को इस घटना की जानकारी मिली, परिजन जिला अस्पताल पहुंचे और वहां गुस्से में आकर हंगामा शुरू कर दिया. अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ, सड़क जाम की गई और जेल प्रशासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए.

बेटे का आरोप-पापा को थाने और जेल में पीटा गया

मृतक शफीक के बेटे ने जेल प्रशासन और पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. बेटे का कहना है कि उसके पिता को पहले थाने में मारा गया और बाद में जेल भेज दिया गया. उसने दावा किया कि वह लगातार तीन दिनों से अपने पिता से मुलाकात कर रहा था और हर बार उनके हाथ सूजे हुए दिखाई दे रहे थे. परिवार ने कई बार पुलिस और जेल प्रशासन से दवा और इलाज की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई.

परिजनों का आरोप है कि शफीक की हालत खराब थी, फिर भी उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई. बेटे ने यहां तक कहा कि “पापा को बहुत मारा गया, बहुत पीटा गया और इलाज भी नहीं कराया गया. पुलिस प्रशासन ने सब कुछ किया और हमारे पापा को मार डाला.”

परिवार ने जिस पुराने विवाद का जिक्र किया, उससे मामला और उलझा

परिवार की ओर से दिए गए बयान में यह भी कहा गया कि मामला पहले से एक मारपीट और कथित प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ था. आरोप है कि दोपहर में कुछ लोग घर में घुस आए थे, जहां घर की एक लड़की के साथ जबरदस्ती की गई और विरोध करने पर धमकी दी गई. परिवार का कहना है कि इसी विवाद के बाद उनके पिता को मारपीट कर जेल भेजा गया. हालांकि इस पूरे हिस्से की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और यह परिवार के आरोपों का हिस्सा है.

मुलाकात के दौरान भी सूजा हुआ था हाथ

शफीक के परिजनों का कहना है कि जब वे जेल में मुलाकात करने गए थे, तब भी उनके हाथ सूजे हुए थे. परिवार का आरोप है कि उन्होंने बार-बार कहा कि दवा दिला दी जाए, इलाज करा दिया जाए, लेकिन जेल और पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. परिवार का दावा है कि शफीक की हालत बिगड़ती रही, लेकिन उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिली. यही वजह है कि अब परिजन उनकी मौत को सामान्य नहीं मान रहे, बल्कि इसे लापरवाही और प्रताड़ना का नतीजा बता रहे हैं.

जेल प्रशासन का बयान

उधर, जेल प्रशासन और पुलिस ने मामले पर अपना पक्ष रखा है. प्रशासन का कहना है कि जिला कारागार में बंद अभियुक्त शफीक की अचानक तबीयत खराब हो गई थी. इसके बाद उसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल उन्नाव लाया गया. अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया.

प्रशासन के मुताबिक, मृतक के शव का नियमानुसार पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. साथ ही परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच कराई जा रही है. पुलिस का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

मारपीट और प्रेम प्रसंग से जुड़ा था मामला

पुलिस के अनुसार, यह मामला मारपीट और प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस का कहना है कि शफीक को पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसके बाद ही जेल भेजा गया. प्रशासन का दावा है कि जब जेल में उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

यह दावा परिजनों के आरोपों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है. ऐसे में अब जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम ही यह साफ कर पाएंगे कि मौत की असली वजह क्या थी-बीमारी, चोट, इलाज में देरी या फिर कुछ और.

डॉक्टरों का बयान-‘कैदी को अस्पताल ब्रॉट डेड लाया गया था’

मामले में डॉक्टरों का बयान भी बेहद अहम माना जा रहा है. जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि शफीक को जेल वार्डन और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा अस्पताल लाया गया था, लेकिन जब उन्होंने मरीज की जांच की तो वह मृत अवस्था में था. डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने तक उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी और दिल की धड़कनें बंद हो चुकी थीं. यानी शफीक को अस्पताल ब्रॉट डेड हालत में लाया गया था.

यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि अगर शफीक की हालत पहले से खराब थी, तो क्या उन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सकता था? और क्या इलाज में कोई देरी हुई?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

फिलहाल शफीक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस और प्रशासन दोनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों की तस्वीर साफ हो पाएगी. इसके साथ ही परिवार द्वारा लगाए गए मारपीट, इलाज न मिलने और लापरवाही के आरोपों की जांच भी शुरू कर दी गई है.

जांच में यह देखा जाएगा कि शफीक को जेल भेजे जाने से पहले उनकी मेडिकल स्थिति क्या थी, जेल के भीतर उन्हें किस तरह की चिकित्सा सुविधा दी गई, तबीयत बिगड़ने पर क्या कदम उठाए गए और अस्पताल पहुंचाने में कहीं कोई देरी तो नहीं हुई.