संभल में सरकारी जमीन पर बनी मुस्तफा कादरी मस्जिद पर चलेगा बुलडोजर? जांच रिपोर्ट के बाद एक्शन मोड में प्रशासन

Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी भूमि पर कथित रूप से बने एक धार्मिक ढांचे को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है.

Sambhal Mosque Demolition News

Sambhal Mosque Demolition News (Photo: AI Generated)

अभिनव माथुर

06 Jun 2026 (अपडेटेड: 06 Jun 2026, 11:11 AM)

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Sambhal Mosque Demolition News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी भूमि पर कथित रूप से बने एक धार्मिक ढांचे को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. मामला नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गांव का है, जहां स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद को लेकर जांच के बाद प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं. अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया है, जिसके चलते अब ध्वस्तीकरण के प्रोसेस को आगे बढ़ाया जा रहा है. लोगों का मानना है कि इसपर बुलडोजर चल सकता है.

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जांच में सरकारी भूमि पर निर्माण का दावा

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित मस्जिद करीब 120 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी हुई है और यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन का हिस्सा बताई जा रही है. इसी आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की है. अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की गई है.

तहसीलदार ने गठित की विशेष टीम

मामले को लेकर तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने एक विशेष टीम का गठन किया है. इस टीम को अवैध निर्माण की स्थिति का सत्यापन करने और ध्वस्तीकरण संबंधी कार्रवाई की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. टीम को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही आगे बढ़ा जाए. प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई को पूरी तरह कानून के दायरे में रखते हुए संपन्न कराना है.

कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी फोकस

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसी नीति के तहत यह कार्रवाई प्रस्तावित की गई है. अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया जा सकता है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे. फिलहाल संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा जारी है और अंतिम निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.