CJI को गाली देने वाले प्रबल यादव ने सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले अपने ताऊ से कही थी ये लास्ट बात, मां की बात तो इमोशनल कर देगी!

अमित तिवारी

• 05:02 PM • 12 Jul 2026

सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के बाद चर्चा में आए प्रबल प्रताप यादव मामले में परिवार का पक्ष सामने आया है. जानिए पिता और ताऊ ने आर्थिक तंगी, कानूनी लड़ाई और पूरे मामले पर क्या कहा.

Prabal Pratap Yadav Family Statement

Prabal Pratap Yadav Family Statement (Photo Enhanced by AI)

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Prabal Pratap Yadav Family Statement: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामे और सीजेआई को अपशब्द बोलने के बाद चर्चा में आए प्रबल प्रताप यादव को लेकर अब उनके परिवार की प्रतिक्रिया सामने आई है. इटावा के भरथना तहसील के नगला जयलाल भोली गांव निवासी प्रबल के पिता और ताऊ का दावा है कि वह लंबे समय से आर्थिक तंगी और कानूनी लड़ाई के तनाव से गुजर रहा था. परिवार का कहना है कि साइबर फ्रॉड से जुड़े एक विवाद में सुनवाई न होने और लगातार बढ़ती परेशानियों ने उसकी मानसिक स्थिति पर असर डाला. फिलहाल सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.

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प्रबल प्रताप के ताऊ रविंद्र सिंह ने क्या कहा?

प्रबल प्रताप यादव के ताऊ रविंद्र सिंह ने कहा कि वह पढ़ाई के साथ नौकरी भी करता था, लेकिन वहां उसके साथ धोखाधड़ी हुई थी. उन्होंने कहा 'आर्थिक स्थिति से बहुत तंग था. जहां नौकरी करता था, उसका पैसा रोक लिया गया था. उसी कारण कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रहा था. किसी ने उसकी सुनवाई नहीं की.' उन्होंने यह भी कहा कि 'वह पढ़ाई में बहुत अच्छा था. इसलिए हमें भी समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हो गया.' परिवार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले उसने घर आकर कहा था कि वह 'अंतिम लड़ाई लड़ने दिल्ली जा रहा हूं, वहां न्याय मिलेगा.'

प्रबल के पिता सुरेंद्र सिंह ने क्या बताया?

प्रबल के पिता सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बेटा आर्थिक संकट और साइबर फ्रॉड के मामले में कार्रवाई न होने से बेहद परेशान था. उन्होंने कहा 'उसके पैसे चले गए थे. शिकायत की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी. पहले लखनऊ में शिकायत की, फिर मामला आगे बढ़ता गया. वह पहले से ही दुखी था.' वहीं उनकी मां कुंती देवी ने कहा 'वह बहुत परेशान रहता था. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. मेरे हार्ट का ऑपरेशन हुआ था और किडनी की भी दिक्कत थी. पैसों की कमी की वजह से वह हमेशा चिंता में रहता था.' परिवार ने यह भी दावा किया कि उसकी पढ़ाई में आर्थिक मदद उसके मामा करते थे क्योंकि घर की स्थिति कमजोर थी.

जांच में पूर्व कंपनी में विवाद की बात भी आई सामने

दूसरी ओर, जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार प्रबल प्रताप यादव लखनऊ के विकास नगर स्थित एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में काम करता था. आरोप है कि नौकरी के दौरान वह अपने एक मुस्लिम सहकर्मी को लगातार परेशान करता था, आपत्तिजनक बातें करता था और ईमेल भेजता था. कंपनी ने पहले उसे चेतावनी दी, लेकिन सुधार नहीं होने पर उसकी नौकरी समाप्त कर दी. इसके बाद उसने कंपनी पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाते हुए एफआईआर की मांग की. पुलिस और अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?

बताया गया कि 10 जुलाई को जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक राधे की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप यादव ने अदालत को संबोधित करते हुए एसीपी विकास नगर, लखनऊ के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की. लेकिन याचिका पूरी तरह खारिज कर दी गई. इसके बाद हंगामा हुआ और यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और प्रबल को लेकर कई तरह के दावे किए जाने लगे.