Jalaun News: उत्तर प्रदेश के जालौन में इस समय जन चौपाल आयोजित हो रही हैं. यहां शासन के अधिकारी जनता से संवाद कर रहे हैं और उनकी परेशानियों को सुन रहे हैं. एक ऐसी ही जन चौपाल जालौन के विकास खंड रामपुरा गांव की पंचायत कंझारी में आयोजित की गई. जन चौपाल में जालौन के जिलाधिकारी और एसपी भी आए हुए थे. मगर तभी यहां कुछ ऐसा हुआ, जिससे यहां का माहौल पूरी तरह से बदल गया.
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दरअसल मंच पर अचानक एक 8 साल की मासूम बच्ची चढ़ गई और वह सीधा जिलाधिकारी और एसपी के पास पहुंच गई. बच्ची ने भावुक होकर जिलाधिकारी और एसपी से जो कहा, उसे सुन दोनों अधिकारी चौंक गए और फिर उन्होंने भी एक अहम फैसला लिया.
बच्ची ने डीएम और एसपी से क्या कहा?
जन चौपाल में अचानक 8 साल की मासूम राधिका मंच पर पहुंची गई. अपनी दबी जुबान और सिसकियों के बीच राधिका ने अपनी दर्दभरी दास्तां जिलाधिकारी और एसपी को सुनाई. उसने बताया कि उसकी मां का निधन हो चुका है और उसके पिता उसे छोड़कर चले गए हैं. ऐसे में वह अनाथ और बेसहारा है.
बच्ची ने एसपी-डीएम से कहा कि वह पढ़ना लिखना चाहती है और आगे जाकर अफसर बनना चाहती है. बता दें कि मासूम की यह बात सुनकर वहां मौजूद जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार भी भावुक हो गए. इसके बाद अधिकारियों ने बच्ची से बात की और उसे हिम्मत दी.
फिर डीएम ने लिया ये फैसला
बता दें कि जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने मंच पर ही राधिका को लेकर ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि अब से राधिका की शिक्षा और भविष्य के सभी आवश्यक खर्चो की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है. जिला प्रशासन उसका खर्चा उठाएगा.
इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वह राधिका को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और कन्या सुमंगला योजना समेत सभी पात्र योजनाओं का लाभ दें. जिलाधिकारी ने साफ कहा कि राधिका का बड़ा अफसर बनने का सपना अब प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है.
DM ने ये कहा
मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने कहा, राधिका का मामला अत्यंत संवेदनशील था. हमने तय किया है कि जिला प्रशासन उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी निभाएगा. उसकी पूरी मदद की जाएगी.
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