Ghaziabad Crime News: 23 जून की वो सुबह... गाजियाबाद की ट्रोनिका सिटी का एक बंद कमरा. बाहर सब कुछ बिल्कुल सामान्य था. लेकिन उस चारदीवारी के भीतर लिखी जा रही थी मौत की एक ऐसी खौफनाक स्क्रिप्ट जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. एक ऐसा मर्डर जिसे सुसाइड का रूप देने के लिए शातिर दिमाग ने हर मोहरा बेहद सलीके से चला. साजिश ऐसी कि कोई डार्क वेब सीरीज का क्राइम थ्रिलर भी फीका पड़ जाए. कातिलों को लगा था कि उनका परफेक्ट मर्डर कभी पकड़ा नहीं जाएगा. लेकिन गुनाह चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो कानून के हाथों से बच नहीं पाता. गाजियाबाद पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर इस सनसनीखेज हत्याकांड के चक्रव्यूह को उधेड़ कर रख दिया और दो सगी बहनें किरण और कशिश अब सलाखों के पीछे हैं.
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भाई की एक तहरीर और घूमने लगी तफ्तीश की सुई
इस खूनी खेल का पर्दाफाश तब शुरू हुआ जब मृतक जाकिर के भाई समीर खान उर्फ नासिर ने ट्रोनिका सिटी थाने पहुंचकर एक तहरीर दी. मामला संदिग्ध और गंभीर था जिसे देखते हुए पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया. इसके बाद गाजियाबाद पुलिस की सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मैनुअल इनपुट की टीमों ने मिलकर एक ऐसा जाल बुना जिसमें मर्डर की मास्टरमाइंड और उसकी सगी बहन जाकर फंस गईं. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी किरण और उसकी बहन कशिश को दबोच लिया.
गौतम बुद्ध नगर से शुरू हुई लव स्टोरी और वो एक 'भयानक शक'
पुलिस कस्टडी में बैठी मुख्य आरोपी किरण ने जब अपना मुंह खोला तो इस पूरे सस्पेंस से पर्दा उठा. पूछताछ में पता चला कि मूल रूप से रामपुर का रहने वाला जाकिर और किरण पहले नोएडा में पड़ोसी थे जहां दोनों के बीच दोस्ती हुई. पिछले 8-9 महीनों से दोनों गाजियाबाद की पूजा कॉलोनी में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे. उस घर में किरण के साथ उसकी 13 साल की बेटी और दो बेटे भी रहते थे.
किरण ने पुलिस को बताया कि उसे जाकिर पर एक भयानक शक था. शक यह कि जाकिर उसकी 13 साल की नाबालिग बेटी पर गलत नजर रखता है. बस इसी एक शक और गृहक्लेश ने किरण के भीतर एक बेरहम कातिल को जन्म दे दिया.
मर्डर का खौफनाक प्लान
किरण ने जाकिर को रास्ते से हटाने के लिए करीब 20 दिन पहले ही अपनी सगी बहन कशिश को बुलंदशहर से गाजियाबाद बुला लिया था. 23 जून की सुबह साजिश के तहत सबसे पहले जाकिर के ही मोबाइल से एक ओला कैब बुक की गई और बच्चों को घर से बाहर भेज दिया गया. अब घर में सिर्फ तीन लोग थे जाकिर, किरण और कशिश.
जैसे ही मौका मिला किरण ने एक भारी डंडे से जाकिर के सिर पर जोरदार वार किया. जाकिर संभल नहीं पाया और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा. इसके तुरंत बाद दोनों बहनों ने मिलकर एक गमछे से जाकिर का गला तब तक घोंटा, जब तक कि उसकी सांसें हमेशा के लिए थम नहीं गईं.
जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बिखेर दी कहानी
मौत पक्की होने के बाद शुरू हुआ खेल का दूसरा हिस्सा यानी सबूत मिटाना और पुलिस को गुमराह करना. दोनों बहनों ने हत्या में इस्तेमाल डंडे को छत पर पानी की टंकी के पीछे छिपा दिया. इसके बाद मर्डर को सुसाइड दिखाने के लिए उन्होंने उसी गमछे को पंखे से बांधकर आत्महत्या का एक फर्जी क्राइम सीन तैयार किया.
यही नहीं किरण ने खुद रोने-चीखने का नाटक किया. जाकिर के भाई को फोन कर सुसाइड की झूठी कहानी सुनाई और खुद उसे अस्पताल भी ले गई ताकि किसी को रत्ती भर भी शक न हो. लेकिन पुलिस की गहन जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटना यानी स्ट्रेंगुलेशन आई. ऐसे में किरण की झूठी कहानी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई.
पुलिस के द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक 'ना ट्रोनिका सिटी पुलिस द्वारा हत्या की इस घटना का अनावरण करते हुए दोनों अभियुक्तों (किरण और कशिश) को गिरफ्तार कर लिया गया है. इनके पास से हत्या में इस्तेमाल डंडा और गमछा बरामद हो चुका है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गला घोंटने की पुष्टि हुई है. आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.'
जाकिर की मौत का वो गमछा और डंडा पुलिस के कब्जे में है. वहीं लिव-इन पार्टनर किरण अपनी सगी बहन कशिश के साथ जेल की सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की सजा का इंतजार कर रही है. गाजियाबाद के इस सनसनीखेज कांड का चैप्टर फिलहाल बंद हो चुका है.
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