Samajwadi Party Internal Conflict: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के भीतर की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है. पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद जिले से शुरू हुआ यह विवाद अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी लखनऊ तक पहुंच चुका है. मुरादाबाद में पार्टी की एक बैठक के दौरान स्थानीय सांसद रुचि वीरा को दूर रखा गया था, जिससे यह पूरा विवाद खड़ा हुआ था. विवाद इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को खुद दखल देना पड़ा है. अखिलेश यादव की कड़ी फटकार के बाद विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है.
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सांसद की शिकायत पर लगी क्लास
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुरादाबाद जिले में पार्टी के पीडीए फार्मूले को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में कमाल अख्तर, जयवीर यादव और जावेद अली जैसे सीनियर नेता शामिल हुए, लेकिन स्थानीय सांसद रुचि वीरा को इसमें नहीं बुलाया गया था. इससे नाराज होकर रुचि वीरा ने अखिलेश यादव से सीधे शिकायत कर दी. इसके बाद अखिलेश यादव ने पिछले हफ्ते पांच बड़े नेताओं को तुरंत लखनऊ तलब किया. लखनऊ में नेताओं ने अखिलेश यादव के सामने ही आपस में बहस शुरू कर दी. कमाल अख्तर गुट ने आरोप लगाया कि रुचि वीरा भी उन्हें अपने कार्यक्रमों में नहीं बुलाती हैं और पोस्टरों से उनका नाम गायब रखती हैं. अखिलेश यादव ने इस अनुशासनहीनता पर सभी को जमकर फटकार लगाई है.
मुख्य सचेतक कमाल अख्तर का इस्तीफा
अखिलेश यादव की इस डांट का असर बैठक के तुरंत बाद देखने को मिला. पार्टी के निर्देश पर मुरादाबाद के कांठ क्षेत्र से विधायक और विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर को फोन करके पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया. इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया. हालांकि, विधानसभा का कार्यकाल अब अपने अंतिम दौर में है, जिससे उनकी निजी राजनीति पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन इस कार्रवाई से अखिलेश यादव ने पूरी पार्टी में ऊपर से नीचे तक यह कड़ा संदेश दे दिया है कि चुनाव के समय किसी भी तरह की गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस कार्रवाई के बाद रुचि वीरा भी फिलहाल शांत नजर आ रही हैं.
चुनाव में हो सकता भारी नुकसान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही अखिलेश यादव ने इस मामले को सख्ती से दबा दिया हो, लेकिन यह अंदरूनी कलह 2027 के चुनाव में पार्टी के लिए बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. मुरादाबाद और आसपास के जिलों में आजम खान के समर्थकों और स्थानीय पुराने नेताओं के बीच आपसी टकराव चल रहा है. टिकट बंटवारे के समय यह खींचतान और ज्यादा बढ़ सकती है. जब बड़े नेता आपस में लड़ेंगे, तो बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा. इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के इस आंतरिक विवाद का सीधा फायदा बीजेपी जैसी विरोधी पार्टियां उठा सकती हैं, जो इसे जनता के सामने अनुशासन की कमी के रूप में पेश करेंगी.
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