Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर एक और नया खुलासा हुआ है. 'यूपी तक' से बातचीत के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने दान पेटी की चाबियों को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि दान पेटी में डबल लॉक सिस्टम था, जिसकी एक चाबी आरोपी टिन्नू यादव के पास और दूसरी चाबी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों के पास रहती थी. ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पूरी तरह ईमानदार बताते हुए इस पूरी चोरी का जिम्मेदार बैंक और उसके कर्मचारियों को ठहराया है.
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दान पेटी की चाबियों का राज
प्रकाश गुप्ता ने बताया है कि राम मंदिर में रखी दान पेटियां बहुत भारी होती थीं, इसलिए उन्हें वहां से उठाया नहीं जाता था और उनके अंदर से ही पैसा निकाला जाता था. दान पेटी को खोलने के लिए एक ही ताले में दो चाबियों वाली व्यवस्था थी, जिसे दोनों चाबियों को एक साथ लगाए बिना नहीं खोला जा सकता था. जब बैंक के लोग आते थे, तो कैंपस के इंचार्ज टिन्नू यादव अपनी चाबी लगाते थे और बैंक वाले अपनी चाबी लगाकर ताला खोलते थे. इसके बाद पैसों को बक्सों में भरकर सीधे काउंटिंग रूम में ले जाया जाता था. चूंकि दोनों चाबियों के बिना ताला खुलना मुमकिन नहीं था, इसलिए इस काम में दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी बनती थी.
दिहाड़ी कर्मचारियों ने की बड़ी हेराफेरी
ट्रस्ट का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक लिखित समझौता हुआ था. इस एग्रीमेंट के तहत चढ़ावे के पैसे को पेटी से निकालने, उनकी गिनती करने और उसे बैंक में जमा करने की पूरी जिम्मेदारी बैंक की तय की गई थी. इसके लिए बैंक ने मंदिर के अंदर ही अपना एक काउंटर भी खोल रखा था. प्रकाश गुप्ता ने खुलासा किया है कि नोटों की गिनती के लिए बैंक अपने नियमित या परमानेंट कर्मचारियों को नहीं लगाता था. बैंक प्रबंधन केवल एक परमानेंट कर्मचारी के साथ डेली बेसिस या दिहाड़ी वाले बाहरी लोगों को गिनती के लिए लाता था. इन अस्थाई लोगों को नौकरी जाने का कोई डर नहीं था, इसलिए इन लोगों ने बिना किसी खौफ के बहुत सफाई से पैसों की हेराफेरी कर ली थी. बाद में पुलिसिया छापों में इन लोगों के घरों से चोरी का पैसा भी बरामद हुआ है.
एसआईटी की जांच लगातार जारी है
ट्रस्ट की तरफ से नोटों की गिनती की निगरानी के लिए एक रिप्रेजेंटेटिव के रूप में रिटायर्ड बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव को रखा गया था. आरोपी इतनी सफाई से चोरी करते थे कि सुभाष श्रीवास्तव को उन पर कभी शक ही नहीं हो पाया था. दूसरी तरफ, इस मामले में पकड़े गए सभी आठ आरोपियों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और सूत्रों के अनुसार उन्होंने पूछताछ में चोरी की बात स्वीकार कर ली है. विपक्ष लगातार पूर्व महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, जिसके बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, विपक्ष का कहना है कि उन्हें सिर्फ इस्तीफा नहीं बल्कि इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई चाहिए.
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