Mirzapur News: अल नीनो के असर से निपटने के लिए किसानों को दी गई नई खेती की सलाह, मिर्ज़ापुर में हुई कार्यशाला

Newzo

• 03:05 PM • 16 Jul 2026

Mirzapur Agriculture News: संभावित अल नीनो के असर को देखते हुए मिर्ज़ापुर में किसानों को मौसम के अनुकूल खेती अपनाने का मंत्र दिया गया. विशेषज्ञों ने कम अवधि वाली धान, दलहन, तिलहन और श्री अन्न की खेती के साथ प्राकृतिक खेती की तकनीकें अपनाने की सलाह दी, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन और आय सुनिश्चित हो सके.

अल नीनो के असर से निपटने के लिए किसानों को दी गई नई खेती की सलाह, मिर्ज़ापुर में हुई कार्यशाला

अल नीनो के असर से निपटने के लिए किसानों को दी गई नई खेती की सलाह, मिर्ज़ापुर में हुई कार्यशाला

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Mirzapur Agriculture News: मौसम की अनिश्चितता और संभावित अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, बरकछा में गुरुवार को एक बृहद कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की. इसमें मिर्ज़ापुर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में किसान, महिला किसान और युवा शामिल हुए.

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कार्यशाला में वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को संभावित अल नीनो के प्रभाव से बचाव के लिए खरीफ सीजन में कम अवधि वाली धान की किस्मों की खेती, धान की सीधी बुवाई, तिल एवं मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों तथा उर्द, मूंग और अरहर जैसी दलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी. साथ ही श्री अन्न (मोटे अनाज) की खेती को भी कम पानी, कम लागत और बेहतर आय का विकल्प बताया गया.

कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष प्रो. श्रीराम सिंह ने बताया कि सांवा, कोदो, रागी, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाजों की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाती है. उन्होंने किसानों को सहफसली एवं मिश्रित खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने की सलाह दी.

उन्होंने प्राकृतिक खेती को भी अल नीनो जैसी परिस्थितियों से निपटने का प्रभावी उपाय बताते हुए बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन (मल्चिंग) और वाफसा जैसी तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया. उन्होंने किसानों से समय रहते आवश्यक कदम उठाकर टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया.

प्रो. श्रीराम सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र, बरकछा में उर्द (आईपीयू-13-2), मूंग (शिखा) और अरहर (आईपीए-203) की उन्नत किस्मों के बीज सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं. इच्छुक किसान 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर केंद्र से बीज प्राप्त कर सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए किसान 9450232889 पर संपर्क कर सकते हैं.