मेरठ में दलित समाज के प्रदर्शन में SSP अविनाश पांडेय के थप्पड़ मारने से बढ़ा विवाद, मृतका ललिता गौतम के गांव में रिपोर्टर को क्या मिला?

उस्मान चौधरी

• 09:48 AM • 10 Jul 2026

Meerut Lalita Gautam Murder Case: मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड के बाद गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बैरिकेडिंग कर आने-जाने वालों की जांच की जा रही है. प्रदर्शन, वायरल वीडियो और पुलिस के दावों के बीच मामला चर्चा में है.

Meerut Lalita Gautam Murder Case

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मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड अब कानून-व्यवस्था और राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है. हत्याकांड के बाद गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. गांव के बाहर बैरिकेडिंग की गई है और आने-जाने वाले लोगों की जांच के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जा रहा है. मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था लागू करने के आदेश मिले हैं.

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गांव के बाहर बैरिकेडिंग, जांच के बाद ही मिल रही एंट्री

यूपी Tak की टीम जब ललिता गौतम के गांव पहुंची तो गांव के बाहर बैरिकेडिंग लगी मिली. पुलिस सभी आने-जाने वालों से पूछताछ कर रही थी. स्थानीय लोगों की भी पहचान पत्र देखने के बाद ही उन्हें गांव में प्रवेश दिया जा रहा था. पुलिसकर्मियों ने बताया कि बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है.

प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद

15 मई को ललिता गौतम लापता हुई थीं. 17 मई को उनका शव बरामद हुआ. पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने की बात कही है. वहीं परिवार और समाज के कुछ लोगों का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. इसी मांग को लेकर मेरठ में प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन देना चाहते थे. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई. इसके बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया.

वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा

प्रदर्शन के दौरान कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. एक वीडियो में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय पुलिस वाहन में जाकर शख्स को थप्पड़ मारते दिखे. वहीं दूसरे वीडियो में सड़क पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक दिखाई देती है. इन वीडियो के सामने आने के बाद घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं.

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अराजक तत्व भी शामिल हो गए थे. सड़क जाम होने से आम लोगों को परेशानी हो रही थी, इसलिए आवश्यक कार्रवाई की गई.

पुलिस का यह भी दावा है कि हिरासत में लिए गए रवि गौतम ने पुलिस वाहन के अंदर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसे पुलिसकर्मियों ने रोक लिया.

इसके साथ ही पुलिस ने दावा किया है कि उसके पास कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं, जिनमें मृतका के भाई को कथित तौर पर पैसे और लाइसेंस का लालच देकर आंदोलन तेज करने के लिए उकसाने की बात सामने आई है. पुलिस ने कहा है कि इन ऑडियो की जांच की जा रही है.

मामला पहुंचा राजनीतिक मंच तक

घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. फिलहाल गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है. पुलिस की निगरानी जारी है और मामले की जांच भी चल रही है. वहीं पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय का इंतजार है.