मां की हत्या कर बेटी भगाने वाले मेरठ के केस में आरोपी पारस का कोर्ट में बड़ा खुलासा, लव एंगल पर ये सब बता गया

Meerut Kaand Latest Update: हत्या के आरोपों पर वकीलों ने बताया कि पारस ने स्वीकार किया कि उस दौरान छीना-झपटी हुई थी. आरोपी का दावा है कि छीना-झपटी के दौरान ही गलती से धारदार हथियार (बलकटी) महिला को लग गई जिससे उनकी मौत हुई. लेकिन उसका इरादा हत्या करना नहीं था.

Paras Som

उस्मान चौधरी

12 Jan 2026 (अपडेटेड: 12 Jan 2026, 02:27 PM)

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Meerut Kaand Latest Update: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित मेरठ कांड (कपसाड़ गांव) में एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है. रुड़की से गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी पारस सोम को कड़ी सुरक्षा के बीच मेरठ कोर्ट में पेश किया गया. यहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. कोर्ट में पेशी के दौरान पारस के वकीलों ने उसके बयानों को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं.

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'किडनैपिंग नहीं, मर्जी से गए थे'

पारस के वकील बलराम सोम ने मीडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में दावा किया कि पारस ने कोर्ट में किडनैपिंग के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पारस का कहना है कि उसने लड़की का अपहरण नहीं किया, बल्कि वे दोनों अपनी मर्जी से साथ गए थे. आरोपी के मुताबिक, उसका और पीड़िता का पिछले ढाई से तीन सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था. 

मां की मौत पर आरोपी का पक्ष

हत्या के आरोपों पर वकीलों ने बताया कि पारस ने स्वीकार किया कि उस दौरान छीना-झपटी हुई थी. आरोपी का दावा है कि छीना-झपटी के दौरान ही गलती से धारदार हथियार (बलकटी) महिला को लग गई, जिससे उनकी मौत हुई, लेकिन उसका इरादा हत्या करना नहीं था.

यहां नीचे देखिए यूपी Tak की स्पेशल वीडियो रिपोर्ट

लड़की का बयान गोपनीय, गांव में चल रही ये चर्चा

मामले में बरामद की गई लड़की के भी धारा 164 के तहत कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए हैं. हालांकि, ये बयान अभी गोपनीय हैं. गांव के लोगों का भी यही कहना है कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग था और इस मामले को लेकर पहले पंचायत भी हो चुकी थी, जिसमें कथित तौर पर कुछ लेन-देन (50000 रुपये) की बात भी सामने आई है.

पूरा मामला क्या है?

8 जनवरी को मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक दलित महिला की हत्या कर दी गई थी और उनकी बेटी लापता थी. आरोप था कि पारस ने मां की हत्या कर बेटी का अपहरण किया है. इस घटना के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई थी और अखिलेश यादव से लेकर मायावती तक ने सरकार को घेरा था.

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