ब्रज क्षेत्र में गौ-रक्षा का पर्याय माने जाने वाले फरसा वाले बाबा की सड़क हादसे में मौत के बाद उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में पुलिस द्वारा जेल भेजे गए दक्ष चौधरी और उनकी टीम के सदस्यों की अब धीरे-धीरे रिहाई शुरू हो गई है. हाल ही में टीम के सदस्य डॉ. प्रकाश सिंह ने जेल से बाहर आने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी रिहाई की पुष्टि की, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो एक बार फिर वायरल हो रहे हैं.
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कौन थे फरसा वाले बाबा और क्या था विवाद?
मथुरा और आसपास के इलाकों में गौ-तस्करों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाने वाले फरसा वाले बाबा अपने समर्थकों के बीच बेहद लोकप्रिय थे. 21 मार्च को उनकी मौत हो गई थी. समर्थकों ने इस हादसे को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे एक गहरी साजिश करार दिया और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए थे.
चक्का जाम और पुलिस के साथ तीखी झड़प
बाबा की मौत के बाद न्याय की मांग कर रहे दक्ष चौधरी और उनकी टीम ने मथुरा में बड़ा आंदोलन किया. पुलिस के समझाने के बावजूद जब प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम नहीं खोला, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई. पुलिस और टीम के सदस्यों के बीच हुई तीखी झड़प के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए दक्ष चौधरी समेत कई कार्यकर्ताओं पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बढ़ता आक्रोश
रिहाई की खबरों के साथ ही सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी के समय के वीडियो और पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की के दृश्य फिर से तैरने लगे हैं. समर्थक इसे गौ-रक्षकों के दमन की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था. वर्तमान में यह मामला गौ-संरक्षण, सामाजिक संघर्ष और पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है.
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