मुरादाबाद पुलिस ने सनसनीखेज मुठभेड़ में कुख्यात बदमाश आशू उर्फ मोंटी चड्ढा को ढेर कर दिया है. मोंटी वही अपराधी था जिसका नाम सुनते ही कारोबारी खौफ से कांप उठते थे. हाल ही में उसने वजीरचंद एक्सपोर्ट फर्म के मालिक अरशू ढल से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी और दहशत फैलाने के लिए फर्म के गेट पर ताबड़तोड़ फायरिंग करवाई थी. इसी हिमाकत ने उसके खात्मे की स्क्रिप्ट लिख दी.
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मामूली अपराधी से 'शार्प शूटर' बनने का सफर
हापुड़ के मीरापुर गांव का रहने वाला आशू साल 2010 में पहली बार चर्चा में आया, जब उसने मामूली विवाद में गांव के ही एक व्यक्ति की फावड़े से काटकर हत्या कर दी थी. गिरफ्तारी के बाद जेल की सलाखें उसके लिए सुधार गृह नहीं, बल्कि अपराध की यूनिवर्सिटी साबित हुईं. जेल के भीतर ही उसका संपर्क कुख्यात उधम सिंह गैंग से हुआ और 2012 में पैरोल पर बाहर आते ही वह इस गैंग का सबसे भरोसेमंद और खूंखार शार्प शूटर बन गया.
वेस्ट यूपी और NCR में फैलाया मौत का जाल
मोंटी चड्ढा ने मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और गाजियाबाद जैसे जिलों को अपना निशाना बनाया. सुपारी लेकर हत्या, फिरौती और बड़ी लूट की वारदातों में उसका नाम प्रमुखता से आने लगा. साल 2014 में मेरठ में हुई दो बड़ी गैंगवार हत्याओं में मोंटी का हाथ था. वह इतनी सफाई से वार करता था कि पुलिस के लिए उसे पकड़ना चुनौती बन गया था. साल 2016 में गाजियाबाद में लूट के मामलों में उसकी गिरफ्तारी जरूर हुई, लेकिन जेल से बाहर आते ही वह फिर से अपनी पुरानी राह पर लौट आया.
व्हाट्सएप रंगदारी और आखिरी एनकाउंटर
मोंटी ने मुरादाबाद के बड़े निर्यातकों को निशाना बनाने के लिए हाई-टेक तरीका अपनाया. उसने अरशू ढल का नंबर हासिल कर व्हाट्सएप के जरिए 5 करोड़ की डिमांड की. जब कारोबारी ने झुकने से इनकार किया, तो मोंटी ने दहशत फैलाने के लिए फायरिंग कराई. पुलिस ने इस मामले को चुनौती के रूप में लिया और बुधवार रात घेराबंदी कर उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा, लेकिन बदमाश की ओर से हुई फायरिंग के जवाब में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया. फिलहाल पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है.
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