Mainpuri Agriculture News: परंपरागत खेती में लगातार नुकसान झेलने के बाद ब्लॉक जागीर क्षेत्र के गांव एलाऊ निवासी किसान सुखबीर कुमार ने सब्जी की खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की नई राह बनाई है. कई वर्षों से वह तोरई, खीरा, ककड़ी सहित अन्य मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इस वर्ष उन्होंने करीब दो बीघा भूमि में तोरई की फसल तैयार की है, जिससे बेहतर मुनाफे की उम्मीद है.
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सुखबीर कुमार ने बताया कि पहले वह आलू, गेहूं, मक्का, मूंगफली और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन लागत बढ़ने और उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण लगातार नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने बताया कि आलू की खेती में भारी निवेश के बावजूद लागत तक नहीं निकल सकी, जबकि पिछले वर्ष बेमौसम बारिश ने सरसों की फसल भी खराब कर दी.
लगातार घाटे के बाद उन्होंने सीमित क्षेत्र में तोरई, खीरा और ककड़ी की खेती शुरू की. बेहतर परिणाम मिलने पर उन्होंने सब्जियों का रकबा बढ़ा दिया. इस वर्ष दो बीघा में तैयार तोरई की फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद है. उनका कहना है कि बरसात के मौसम में तोरई की मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं और समय पर फसल तैयार होने पर अच्छी बचत भी हो जाती है.
सुखबीर के अनुसार सब्जी की खेती में समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और नियमित देखभाल जरूरी होती है. मेहनत पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक जरूर है, लेकिन इसके मुकाबले आमदनी भी बेहतर मिलती है. तैयार फसल को मंडी में बेचने पर उचित मूल्य मिलने से किसानों को सीधा लाभ होता है.
किसान की सफलता से आसपास के अन्य किसान भी सब्जी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के अनुरूप फसल का चयन, उन्नत बीजों का उपयोग और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन अपनाकर कम भूमि से भी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है. ऐसे में सब्जी की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बनती जा रही है.
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