कानपुर किडनी रैकेट: एंबुलेंस ड्राइवर बना 'डॉक्टर', ओटी टेक्निशियन ने विदेशी महिला की निकाली किडनी

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश. एंबुलेंस ड्राइवर शिवम और टेक्निशियन मुदस्सर अली डॉक्टर बनकर कर रहे थे अवैध ऑपरेशन. विदेशी महिला का वीडियो भी आया सामने.

यूपी तक

• 12:41 PM • 07 Apr 2026

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कानपुर में चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है. इस गैंग में शामिल मुख्य किरदार असली डॉक्टर नहीं, बल्कि एंबुलेंस चलाने वाले ड्राइवर और अस्पतालों के ओटी टेक्निशियन (OT Technicians) थे. ये लोग सफेद कोट पहनकर बड़े डॉक्टरों की तरह मरीजों से डील करते थे और अवैध तरीके से उनके अंगों का सौदा कर रहे थे. मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

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दक्षिण अफ्रीकी महिला का अवैध ट्रांसप्लांट और वायरल वीडियो

इस गिरोह की करतूतों का भंडाफोड़ तब हुआ जब गिरफ्तार एंबुलेंस ड्राइवर शिवम के मोबाइल से एक वीडियो मिला. वीडियो में शिवम खुद डॉक्टर बनकर दक्षिण अफ्रीका की एक महिला मरीज अरेबिका का चेकअप करता दिख रहा है. 3 मार्च को कानपुर में अरेबिका का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. ऑपरेशन के बाद जब वह दर्द से कराह रही थी, तब शिवम उससे अंग्रेजी में "How are you Arebica?" पूछकर डॉक्टर की तरह व्यवहार कर रहा था. पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने मेरठ की एक महिला पारुल तोमर का भी बिना अनुमति के ट्रांसप्लांट किया था, जिसके लिए बिहार के आयुष से किडनी ली गई थी.

टेक्निशियन निकला 'ऑपरेशन' करने वाला मुख्य आरोपी

पुलिस जांच में एक और सनसनीखेज तथ्य सामने आया है. गिरोह का जो सदस्य खुद को दिल्ली का बड़ा डॉक्टर मुदस्सर अली सिद्दीकी बताकर ऑपरेशन करता था, वह असल में महज एक ओटी टेक्निशियन निकला. जब पुलिस की टीम उसके घर पहुंची, तो परिजनों ने खुलासा किया कि वह डॉक्टर नहीं है. इसी तरह, गिरोह में शामिल डॉक्टर रोहित नाम का शख्स कन्नौज का एक झोलाछाप डॉक्टर निकला, जो पहले गांव में छोटी दुकान चलाता था. पुलिस अब तक इस मामले में आईएमए की पूर्व उपाध्यक्ष प्रीति अहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह, एंबुलेंस चालक शिवम और दो टेक्निशियन कुलदीप व राजेश को जेल भेज चुकी है.

सात-आठ अस्पतालों के नाम आए सामने, जांच जारी

डीसीपी एसएम कासिम आब्दी के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में कानपुर के करीब 7 से 8 नामचीन अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, जहाँ ये अवैध ऑपरेशन किए जाते थे. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि पुलिस की टीमें अब दिल्ली, मेरठ, कन्नौज और लखनऊ तक दबिश दे रही हैं. पुलिस उन असली डॉक्टरों और अस्पताल मालिकों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिन्होंने इन टेक्निशियनों को ऑपरेशन थिएटर (OT) उपलब्ध कराया और इस गोरखधंधे को फलने-फूलने दिया.