देश में पेट्रोल की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि ने आम आदमी को चौतरफा संकट में डाल दिया है. पेट्रोल के दाम बढ़ने से न सिर्फ रोजमर्रा का सफर महंगा हुआ है, बल्कि इसकी वजह से महंगाई की समस्या भी पहले से कहीं ज्यादा विकराल हो गई है. पेट्रोल हमेशा से परिवहन और दैनिक आवश्यकताओं की कीमतों को तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, हाल ही में महज 1 महीने के भीतर पेट्रोल के दाम करीब 4 बार बढ़े हैं, जिसने मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों की आर्थिक परेशानी को और गहरा कर दिया है.
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थाली तक पहुंची महंगाई की आंच, जरूरी सामान हुए महंगे
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब खाने-पीने की चीजों, जीवनरक्षक दवाओं और अन्य जरूरी सामानों पर दिखने लगा है. ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (माल ढुलाई का खर्च) बढ़ने के कारण मंडियों में फल, सब्जी और राशन के दाम आसमान छू रहे हैं. रोजमर्रा की चीजें महंगी होने से गरीब और मजदूर वर्ग के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. आम जनता का कहना है कि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ ईंधन और बढ़े हुए खर्चों की भेंट चढ़ रहा है.
मांग में कोई कमी नहीं, पेट्रोल पंपों पर बढ़ रही भीड़
एक तरफ जहां बढ़ती कीमतों के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर पूरी तरह प्रभावित नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल पंपों पर वाहनों की भीड़ में कोई कमी नहीं देखी जा रही है. दैनिक कामकाज और यात्राओं की मजबूरी के कारण पेट्रोल की मांग जस की तस बनी हुई है, लेकिन लगातार बढ़ते दाम देश की आर्थिक स्थिति और आम घरों के घरेलू बजट दोनों को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं.
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