Fake Marksheet Racket: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कानपुर पुलिस ने नकली मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट तैयार करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर देशभर में अपना नेटवर्क फैलाकर लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध करा रहा था. इस मामले में गिरोह के सरगना मनीष कुमार को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसके सहयोगी अर्जुन यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है. पुलिस का दावा है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों में इसकी फ्रेंचाइजी तक फैली हुई थी.
ADVERTISEMENT
खुद को डॉक्टर बताता था मास्टरमाइंड, असल में 12वीं तक पढ़ा
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का मुख्य आरोपी मनीष कुमार खुद को ‘डॉ.’ बताकर लोगों के बीच पहचान बनाता था, जबकि उसकी वास्तविक शैक्षणिक योग्यता सिर्फ 12वीं तक की थी. आरोपी मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला बताया जा रहा है, जिसने बाद में बिहार और फिर हैदराबाद में अपना ठिकाना बना लिया था. पुलिस के मुताबिक, मनीष लंबे समय से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था.
व्हाट्सएप से चलता था पूरा नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह व्हाट्सएप के जरिए फर्जी दस्तावेजों का लेन-देन करता था. ग्राहक से संपर्क करने के बाद मार्कशीट, डिग्री और अन्य प्रमाण पत्र तैयार किए जाते थे. इसके बदले आरोपी लोगों से 80 हजार से 90 हजार रुपये तक वसूलते थे. पुलिस का कहना है कि गिरोह की अलग-अलग राज्यों में फ्रेंचाइजी बनाई गई थी, जिससे नेटवर्क तेजी से फैलता गया.
80 से ज्यादा नकली मार्कशीट बनाने का आरोप
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी मनीष कुमार अब तक 80 से अधिक फर्जी मार्कशीट तैयार कर चुका था. फरवरी महीने में पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 1,000 से ज्यादा नकली दस्तावेज बरामद किए थे, जिसके बाद मामले की गहराई से जांच शुरू की गई. मोबाइल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस इस पूरे रैकेट तक पहुंची.
उन्नाव का कोचिंग संचालक भी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने गिरोह के एक अन्य सदस्य अर्जुन यादव को भी गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि अर्जुन उन्नाव में एक कोचिंग सेंटर चलाता था और गिरोह के लिए लोगों तक पहुंच बनाने का काम करता था. जांच के दौरान संजय पंजानी और शेखर गुप्ता सहित कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनसे आरोपियों के संपर्क की पुष्टि हुई है.
नकली सम्मान समारोहों से बनाता था पहचान
पुलिस के मुताबिक, आरोपी मनीष कुमार ने अपनी पहचान मजबूत करने और लोगों का भरोसा जीतने के लिए देश के कई बड़े शहरों में फर्जी सम्मान समारोह आयोजित किए. मुंबई, पुणे, बेंगलुरु समेत कई शहरों में कथित पुरस्कार कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका इस्तेमाल नकली प्रतिष्ठा बनाने के लिए किया जाता था. पुलिस का मानना है कि इन आयोजनों के जरिए लोगों को प्रभावित कर उन्हें जाल में फंसाया जाता था.
2019 से सक्रिय था गिरोह, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह साल 2019 से सक्रिय था और लगातार फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर लोगों को गुमराह कर रहा था. पुलिस का कहना है कि गिरोह ने कई लोगों को वकील और डॉक्टर जैसे पेशों के नाम पर भी ठगी का शिकार बनाया. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए अन्य आरोपियों और फ्रेंचाइजी संचालकों की तलाश में जुटी है.
पुलिस की कार्रवाई जारी, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कानपुर पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच लगातार जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं. इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और प्रमाणिक दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके.
ADVERTISEMENT









