ITBP Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में इलाज के दौरान भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के एक जवान की मां का हाथ काटे जाने का मामला अब बेहद गरमा गया है. इस पूरे घटनाक्रम में महज 36 घंटे के भीतर स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह से बदल गई है, जिसमें डॉक्टरों की लापरवाही की बात सामने आई है. इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अब अस्पताल और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में जुट गई है. दूसरी तरफ, शनिवार को भारी संख्या में हथियारबंद जवानों के साथ पुलिस कमिश्नर दफ्तर पहुंचने वाले ITBP कमांडेंट के आचरण को लेकर कानपुर के पुलिस कमिश्नर ने नाराजगी जताई है और ITBP के महानिदेशक (DG) को पत्र लिखकर जांच की मांग की है.
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महज 36 घंटे में बदल गई मेडिकल रिपोर्ट
ITBP अधिकारियों और पीड़ित परिवार के भारी विरोध के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित डॉक्टरों के नए पैनल ने अपनी जांच रिपोर्ट में बड़ा बदलाव किया है. एडिशनल चीफ मेडिकल ऑफिसर (ACMO) समेत 4 वरिष्ठ डॉक्टरों के पैनल ने अपनी नई रिपोर्ट में यह माना है कि उपचार के दौरान मरीज की नसों में खून के थक्के बनने लगे थे, जिससे हाथ में दबाव बढ़ा और सूजन के साथ-साथ संक्रमण तेजी से फैल गया. जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इलाज करने वाले डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही बरती. अगर अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते किसी वैस्कुलर सर्जन (नसों के विशेषज्ञ डॉक्टर) से परामर्श लिया होता और जरूरी सर्जिकल हस्तक्षेप किया होता, तो मरीज का हाथ काटने की नौबत को टाला जा सकता था. डॉक्टरों द्वारा समय पर विशेषज्ञ की सलाह न लेना ही इस बड़ी लापरवाही की मुख्य वजह बनकर सामने आया है.
पुलिस कमिश्नर ने ITBP डीजी को भेजा पत्र
इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब शनिवार को इंसाफ की मांग को लेकर ITBP के एक कमांडेंट गौरव प्रसाद अपने साथ लगभग 50 सशस्त्र (हथियारबंद) जवानों और दर्जनभर वाहनों के काफिले के साथ अचानक कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए थे. जवानों की इस भारी मौजूदगी से पूरा पुलिस मुख्यालय छावनी में तब्दील हो गया था, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया था. इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कड़ा रुख अपनाया है. पुलिस आयुक्त ने ITBP के महानिदेशक (DG) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है. इस पत्र में उन्होंने शनिवार को कमिश्नरेट परिसर में हुए पूरे घटनाक्रम और ITBP कमांडेंट के इस आचरण की विस्तृत जानकारी दी है. पुलिस कमिश्नर ने इस प्रकार बल के साथ दफ्तर पहुंचने को अनुशासन के दायरे से बाहर मानते हुए मामले में आवश्यक जांच और कार्रवाई की मांग की है.
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद महराजपुर स्थित ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी (56 वर्ष) के इलाज से जुड़ा हुआ है. विकास सिंह ने 13 मई को अपनी मां को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण टाटमिल स्थित कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया था. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने एक गलत इंजेक्शन या लापरवाही से कैनुला लगाया, जिसके बाद उनके हाथ में भारी सूजन आ गई और कालापन छाने लगा. देखते ही देखते संक्रमण इतना बढ़ गया कि उन्हें दूसरे अस्पताल (पारस हॉस्पिटल) में शिफ्ट करना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण को पूरे शरीर में फैलने से रोकने के लिए 17 मई को महिला का दाहिना हाथ काट दिया.
इस घटना के बाद पीड़ित जवान न्याय के लिए भटकता रहा और बीते दिनों वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक आइस बॉक्स (बर्फ के डिब्बे) में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया था, जिसके बाद हड़कंप मच गया था. पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर सीएमओ ने जांच बैठाई थी, लेकिन शुक्रवार को आई पहली रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीनचिट देने की कोशिश की गई थी और संक्रमण की वजह को अस्पष्ट रखा गया था. पहली रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर ही ITBP के अधिकारी और जवान शनिवार को कमिश्नर दफ्तर पहुंचे थे, जिसके बाद प्रशासन ने दोबारा जांच कराई और अब डॉक्टरों की लापरवाही उजागर होने के बाद पुलिस कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है.
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