4200 करोड़ में बने इस एक्सप्रेसवे की 20 दिनों में 5वीं बार हुई मरम्मत, टूटी सड़क पर NHAI ने बैठाई जांच

सिमर चावला

05 Aug 2026 (अपडेटेड: 05 Aug 2026, 08:20 AM)

कानपुर से लखनऊ के बीच तेज और सुगम सफर के लिए शुरू किए गए कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के महज 20 दिन बाद ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

Kanpur Lucknow Expressway Repair

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Kanpur Lucknow Expressway Repair: कानपुर से लखनऊ के बीच तेज और सुगम सफर के लिए शुरू किए गए कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के महज 20 दिन बाद ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में अब तक 5 से 6 बार मरम्मत किए जाने का दावा किया जा रहा है. इस बार उन्नाव के पास सड़क की खराब हुई सतह को ठीक करने का काम चल रहा है. हमारे ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है, जबकि करीब 200 से 300 मीटर के हिस्से में सड़क सुधार का काम जारी है.

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जहां पहले हुई थी मरम्मत, फिर वहीं आई खराबी

मरम्मत को लेकर सबसे बड़ा सवाल उस हिस्से पर उठ रहा है, जहां पहले भी सड़क की सतह खराब हो चुकी थी. उन्नाव में कोरारी टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर आगे लखनऊ की तरफ किलोमीटर संख्या 64 के पास सड़क की ऊपरी सतह दबने और फटने की शिकायत सामने आई थी. इसके बाद 26 जुलाई को वहां मरम्मत कराई गई थी. लेकिन करीब 8 से 9 दिन बाद उसी स्ट्रेच में दोबारा समस्या सामने आ गई और अब फिर से सड़क सुधार का काम कराया जा रहा है. इससे एक्सप्रेसवे के निर्माण और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

3 किलोमीटर हिस्से में बैरिकेडिंग

फिलहाल एक्सप्रेसवे के जिस हिस्से में मरम्मत चल रही है, वहां करीब 3 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग की गई है. वाहनों को सिंगल लेन से निकाला जा रहा है और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है. करीब 200 से 300 मीटर के हिस्से में सड़क की ऊपरी सतह को सुधारने का काम चल रहा है. एक्सप्रेसवे का उद्देश्य कानपुर और लखनऊ के बीच सफर को तेज और सुविधाजनक बनाना था, लेकिन बार-बार मरम्मत के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

NHAI ने शुरू कराई जांच

बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए NHAI ने पूरे मामले की जांच शुरू कराई है. शुरुआती कार्रवाई के तहत तीन इंजीनियरों को परियोजना से हटा दिया गया है और उन्हें दो साल के लिए NHAI तथा उससे जुड़े उपक्रमों की परियोजनाओं में काम करने से डिबार किया गया है यानि उनके काम करने पर रोक लगाई गई. कार्रवाई की जद में निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर-कम-डीजीएम (हाईवे) विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार शामिल हैं. NHAI के मुताबिक, इन अधिकारियों पर परियोजना की निगरानी में लापरवाही बरतने को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है.

NHAI की जांच में क्या वजह सामने आई?

NHAI अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तकनीकी जांच में सड़क की खराबी पुल के स्ट्रक्चर में नहीं पाई गई है. अधिकारियों के अनुसार, समस्या ऊपरी बिटुमिनस लेयर और पेवमेंट में स्लिपेज की वजह से सामने आई है. उनका कहना है कि पुल की नींव, सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित हैं. अब तकनीकी टीम यह पता लगाने में जुटी है कि सड़क की सतह बार-बार खराब क्यों हो रही है. जांच में निर्माण प्रक्रिया में कमी, इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन या मेंटेनेंस में लापरवाही जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है.

यात्रियों की बढ़ी परेशानी

बार-बार मरम्मत का असर एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों पर भी पड़ रहा है. मरम्मत वाले हिस्से में सिंगल लेन से वाहनों की आवाजाही होने और करीब 3 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग के कारण वाहन चालकों को परेशानी हो रही है. कुछ नियमित यात्रियों का कहना है कि सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई लोग अब एक्सप्रेसवे के बजाय पुराने कानपुर-लखनऊ मार्ग का इस्तेमाल करने लगे हैं. ऐसे में जिस एक्सप्रेसवे से तेज और बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद की गई थी, उसकी मौजूदा स्थिति यात्रियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है.

4200 करोड़ की परियोजना

करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था. लेकिन उद्घाटन के बाद लगातार सामने आ रही तकनीकी दिक्कतों और अलग-अलग हिस्सों में बार-बार हो रही मरम्मत ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासतौर पर उसी हिस्से में 8 से 9 दिन के भीतर दोबारा खराबी सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है. अब सबसे ज्यादा नजर NHAI की जांच रिपोर्ट पर है. इसी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आखिर एक्सप्रेसवे के शुरू होने के महज 20 दिन के भीतर बार-बार मरम्मत की नौबत क्यों आई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है.