कानपुर में सरकारी अस्पताल के Dr. रामकेश गए थे कोर्ट, उनका ड्राइवर OPD में बैठकर करने लगा इजाल, दोनों बुरे फंसे!

रंजय सिंह

• 12:48 PM • 17 Sep 2026

कानपुर के कांशीराम जिला अस्पताल में डॉक्टर की गैरहाजिरी में उनका ड्राइवर ओपीडी में बैठकर मरीजों को दवाएं लिखता मिला. वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर डॉक्टर से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा और एफआईआर की बात कही.

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उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित कांशीराम जिला अस्पताल से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. ओपीडी में जब डॉक्टर साहब की कुर्सी खाली हुई तो उनके ड्राइवर साहब खुद 'डॉक्टर' बनकर मरीज का इलाज करने बैठ गए. डॉक्टर की गैरहाजिरी में उनका ड्राइवर देवेंद्र प्रताप बकायदा ओपीडी सीट पर बैठकर मरीज के पर्चे पर दवाइयां लिखता हुआ कैमरे में कैद हुआ. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.

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ड्राइवर ने संभाला ओपीडी

पूरा मामला कानपुर के कांशीराम जिला अस्पताल का है जहां पिछले कई सालों से तैनात डॉ. रामकेश की ओपीडी में ड्यूटी थी. जानकारी के मुताबिक जिस समय मरीज इलाज की उम्मीद में लाइन में लगे थे उस दौरान डॉक्टर रामकेश किसी मामले में कोर्ट में पेशी के लिए गए हुए थे. लेकिन ओपीडी बंद करने या किसी अन्य डॉक्टर को चार्ज देने के बजाय उनकी सीट पर उनका ड्राइवर देवेंद्र प्रताप बैठ गया और मरीजों को देखना शुरू कर दिया.

बाहर के मेडिकल स्टोर से लिखी जा रही थीं दवाएं

हैरानी की बात यह है कि ड्राइवर सिर्फ सीट पर बैठा ही नहीं बल्कि मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदी जाने वाली दवाएं भी लिखकर दे रहा था. अस्पताल परिसर में मौजूद किसी व्यक्ति ने ड्राइवर के इस दुस्साहस का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. वीडियो सामने आते ही यह सवाल उठने लगा है कि अगर बिना डॉक्टरी पढ़ाई के ड्राइवर ही दवाइयां तय करेगा, तो मरीजों की जान के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ हो सकता है.

डॉक्टर से 3 दिन में मांगा स्पष्टीकरण

वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है और मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही है. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि 'वीडियो वायरल होने के बाद तत्काल प्रभाव से जांच शुरू करा दी गई है. संबंधित डॉक्टर से 3 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है. इसके साथ ही डॉक्टर की सीट पर बैठकर दवा लिखने वाले ड्राइवर की पहचान कर उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआरदर्ज कराई जाएगी.'

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