मुंह से निकला अक्का और 70 साल की भारत अम्मा को 14 साल बाद मिला परिवार! कानपुर में जिन्हें पागल समझा उनके संग हुआ चमत्कार

रंजय सिंह

• 04:11 PM • 21 Nov 2025

भगवान राम को माता कैकेई के वरदान मांगने पर चौदह साल का वनवास हुआ था, जबकि तेलंगाना की भारत अम्मा को सिर्फ दूसरी भाषा न जानने के कारण चौदह साल से भी अधिक का वनवास सहना पड़ा. भारत अम्मा की कहानी आपको इमोशनल कर देगी. पढ़िए उनकी पूरी कहानी.

Kanpur Bharat Amma News

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तेलंगाना की भारत अम्मा नामक 70 साल की महिला की कहानी इमोशनल है. सिर्फ दूसरी भाषा खासतौर पर हिंदी न जानने के कारण भारत अम्मा को 14 साल से भी ज्यादा समय का 'वनवास' सहना पड़ा. घरवाले भी शायद ये मान चुके थे कि भारत अम्मा अब उन्हें कभी नहीं मिल पाएंगी. उन्होंने भी हार मान ली थी. कई जगह से भटकते-भटकटे भारत अम्मा कानपुर पहुंची. सड़क पर चोट लग जाने के कारण वह अस्पताल में भर्ती हुईं. यहीं एक डॉक्टर भारत अम्मा के जीवन में दूत बनकर आ गए. डॉक्टर की सतर्कता की वजह से भारत अम्मा आज अपने घर वालों के साथ हैं. भारत अम्मा संग क्या-क्या हुआ, उनकी पूरी कहानी खबर में तफ्सील से पढ़िए. 

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2023 में कानपुर पहुंचीं थी भारत अम्मा

तेलंगाना के महबूबनगर की रहने वालीं 70 साल की भारत अम्मा 2010 के अंत में अपने गांव से भटक गई थीं. स्टेशन पर भीख मांगते हुए कोई उन्हें ट्रेन पर चढ़ा देता था. ऐसे करके कई स्टेशनों पर भटकटे-भटकटे भारत अम्मा साल 2023 में कानपुर पहुंचीं. यहां कुछ दिन पहले उन्हें सड़क पर चोट लग गई. कानपुर पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया. भारत अम्मा केवल तेलंगाना की भाषा बोलती थीं. इस वजह से लोग उन्हें मानसिक रूप से बीमार समझने लगे. 

परिवार वाले मान चुके थे कि भारत अम्मा नहीं रहीं...

भारत अम्मा के परिवार ने कई सालों तक उन्हें ढूंढा. वे 14 साल पहले भारत अम्मा के गुमशुदा होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवा चुके थे. कोरोना के दौरान वे मान चुके थे शायद उनकी मां अब नहीं रहीं.

फिर कहानी में एंट्री हुई डॉक्टर भारद्वाज की

जब अस्पताल में भारत अम्मा भर्ती थीं, तब उस दिन राउंड पर डॉक्टर भारद्वाज थे. डॉक्टर भारद्वाज तेलंगाना के रहने वाले थे और तेलगु जानते थे. जब भारत अम्मा ने अपने मुंह से 'अक्का' शब्द बोला, तब डॉक्टर भारद्वाज समझ गए कि वह पागल नहीं बल्कि तमिल भाषा बोलती हैं. उन्होंने नर्स को कहा और गूगल पर उनकी जगह खोजी. इसके बाद महबूबनगर पुलिस से संपर्क किया गया. 

14 साल बाद हुआ भारत अम्मा और उनके बेटे का मिलन

पुलिस ने परिवार को सूचना दी. परिवार आकर कानपुर अस्पताल पहुंचा. भारत अम्मा और उनके बेटे का 14 साल बाद मिलन हुआ. सभी अस्पताल कर्मियों की आंखें नम हो गईं. डॉक्टर और नर्स को परिवार ने धन्यवाद दिया. अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर वी पाल ने बताया कि वे भाव विभोर थे. भारत अम्मा ने बेटे से बड़ा प्यार पाया और उनके वनवास का अंत हुआ. भारत अम्मा के बेटे तिरुमल यादव ने कहा कि उन्हें नहीं पता था मां कहां गई थीं. परिवार ने कई बार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. लेकिन अब वो अपनी मां से मिल खुश हैं. 

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