राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय अभ्यास वर्ग में शिक्षकों की तमाम समस्याओं जैसे ट्रांसफर, पोस्टिंग से लेकर टीईटी अनिवार्यता खत्म करने को लेकर चर्चा हुई. शिक्षकों ने माना कि सेवा में बने रहने के लिए TET की पास करने की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है.
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अभ्यास वर्ग का समापन रविवार को हुआ. समापन सत्र के मुख्य अतिथि महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय मेधावी रहे. इस दो दिवसीय कार्यक्रम में संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण और विद्यालय के प्रति उनके उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक किया.
विद्यालय मात्र कार्यस्थल नहीं, श्रद्धा का केंद्र है: मोहन पुरोहित
अभ्यास वर्ग के दूसरे दिन प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महासचिव मोहन पुरोहित ने 'हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ' विषय पर गहराई से चर्चा की. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय को मात्र एक कार्यस्थल न मानकर उसे श्रद्धा का केंद्र यानी 'तीर्थ' समझना चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से विद्यालय परिसर की साफ-सफाई और सुंदरीकरण पर बल दिया, ताकि वहां का वातावरण छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरणादायी बना रहे.
शिक्षक समस्याओं के समाधान का मिला भरोसा
अंतिम सत्र में गोरखपुर एवं काशी प्रांत के विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों ने अपनी सेवा संबंधी समस्याओं को पटल पर रखा. प्रदेश अध्यक्ष प्रो. संजय मेधावी ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि संगठन पुरानी पेंशन बहाली, टेट (TET) अनिवार्यता खत्म करने, अंतर्जनपदीय स्थानांतरण, 17140 वेतन मुद्दा, और बीटीसी 2001 व विशिष्ट बीटीसी 2004 बैच की पुरानी पेंशन लागू कराने हेतु शासन के साथ निरंतर संवाद कर रहा है. उन्होंने सभी समस्याओं के शीघ्र निराकरण का भरोसा दिया.
शिक्षा के केंद्र में हो 'भारत' और 'भारतीयता'
अखिल भारतीय वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार ने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षण कार्य के केंद्र में 'भारत' और 'भारतीयता' का भाव अनिवार्य होना चाहिए. उन्होंने स्वदेशी चिंतन और भारतीय मूल्यों को शिक्षा में समाहित करने की सलाह दी. कार्यक्रम के अंत में प्रदेश अध्यक्ष द्वारा गोरखपुर की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई.
कार्यक्रम में संयोजक जयप्रकाश मद्धेशिया, जिला सह संयोजक धर्मेंद्र कुमार सिंह, विजय बरनवाल, अजय कुमार, महेंद्र कुमार पटेल और बृजनंदन यादव अलावा हरे कृष्णा पाण्डेय, राजेश शुक्ल, आञ्जनेय त्रिपाठी, अविनाश शुक्ल, ऋषिकेश गुप्तसमेत बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
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