AI समिट में चीन के रोबोट डॉग वाले मामले के बाद गलगोटिया की प्रोफेसर नेहा सिंह के साथ क्या हुआ? पता चल गया

Galgotias University Controversy: दिल्ली एआई समिट में रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया. सोशल मीडिया पर दावों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्रोफेसर को शो-कॉज नोटिस जारी किया है.

Professor Neha Singh

सोनिया

19 Feb 2026 (अपडेटेड: 19 Feb 2026, 04:35 PM)

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Galgotias University Controversy: दिल्ली में आयोजित एआई समिट एक्सपो के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर प्रदर्शित एक रोबोटिक कुत्ते को लेकर सवाल उठने लगे. सोशल मीडिया पर तेजी से यह दावा किया गया कि विश्वविद्यालय जिस रोबोट को अपना आविष्कार बता रहा है, वह दरअसल चीन में निर्मित एक रेडीमेड यूनिट है. इसके बाद ऑनलाइन ट्रोलिंग शुरू हो गई और मामला चर्चा का विषय बन गया कि एक्सपो में विश्वविद्यालय ने ‘ओरियन’ नाम से एक रोबोटिक डॉग पेश किया था. तकनीकी विशेषज्ञों और आलोचकों ने आरोप लगाया कि यह रोबोट यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित नहीं, बल्कि चीन की कंपनी Unitree Robotics के मॉडल ‘Unitree Go2’ का संस्करण है. विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौड़ ने सामने अकर पूरी स्थिति स्पष्ट की है. 

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शब्दों के गलत चयन से बढ़ा विवाद

रजिस्ट्रार डॉ. एनके गौड़ ने कहा कि यह पूरा मामला शब्दों के गलत चयन के करण उत्पन्न हुआ है. उनके अनुसार विश्वविद्यालय ने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोट पूरी तरह उनका खुद का आविष्कार है. उन्होंने बताया कि रोबोट को रिसर्च और डेवलपमेंट के उद्देश्य से खरीदा गया था ताकि छात्र वर्तमान वैश्विक तकनीक को समझ सकें और उस पर आगे काम कर सकें. 

उन्होंने कहा कि फैकल्टी की ओर से ‘डेवलप’ और ‘डेवलपमेंट’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल में भ्रम हो गया, जिससे यह संदेश गया कि रोबोट विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है. जबकि वास्तविकता यह है कि इसे एक इंडियन कंपनी के माध्यम से खरीदा गया था, जिसने संभवतः इसे विदेश से आयात किया होगा.  डॉ. गौड़ ने स्पष्ट किया कि गलती सामने आते ही विश्वविद्यालय ने प्रेस रिलीज जारी कर स्थिति स्पष्ट की और खेद भी व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का उद्देश्य केवल छात्रों को दुनिया में चल रही नवीनतम तकनीक से परिचित कराना है ताकि वे उससे बेहतर समाधान विकसित कर सकें. 

प्रोफेसर पर कार्रवाई की अटकलों पर जवाब

सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा थी कि संबंधित प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी से हटा दिया गया है. इस पर रजिस्ट्रार ने कहा कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने बताया कि संबंधित फैकल्टी सदस्य को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है, क्योंकि मामला विश्वविद्यालय और देश की छवि से जुड़ा है.

उन्होंने कहा कि टेक्निकल जानकारी देने के लिए वहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ मौजूद थे लेकिन मीडिया बाइट संबंधित प्रोफेसर से ली गई, जिन्हें तकनीकी विवरण की पूरी जानकारी नहीं थी. इसी कारण शब्दों का चयन गलत हुआ और विवाद खड़ा हो गया. 

रिसर्च के लिए खरीदा गया रोबोट

रजिस्ट्रार ने यह भी स्पष्ट किया कि रोबोट विश्वविद्यालय के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लॉक में रखा गया है और छात्र उस पर रिसर्च कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी का उद्देश्य विश्व स्तर पर इस्तेमाल हो रही तकनीकों को समझना और छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देना है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय दुनिया भर की उन्नत लैबोरेटरीज स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है और विभिन्न तकनीकों को अध्ययन के लिए ला रहा है. उनका कहना था कि किसी भी नई तकनीक को समझने और उससे आगे बढ़ने के लिए पहले उसे अध्ययन करना जरूरी है.

एआई समिट में क्या प्रस्तुत किया गया

रजिस्ट्रार के अनुसार एआई समिट में विश्वविद्यालय की ओर से छात्र अपने प्रोजेक्ट और मॉडल लेकर गए थे. उद्देश्य यह था कि छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपने काम और इनोवेशन को प्रस्तुत करें. हालांकि, गलत शब्दों के इस्तमाल के कारण पूरी चर्चा नकारात्मक दिशा में चली गई. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय 2011  से स्थापित है और लगातार बेहतर शैक्षणिक कार्य कर रहा है. 2024 में उसे बेस्ट यूनिवर्सिटी का अवॉर्ड भी मिल चुका है. विभिन्न इंडस्ट्री के साथ टाई-अप, अत्याधुनिक लैबोरेटरीज की स्थापना और छात्रों की उपलब्धियां इसका प्रमाण हैं.

‘एक गलती से पूरी व्यवस्था पर सवाल नहीं’

डॉ. गौड़ ने दोहराया कि गलती हुई है और विश्वविद्यालय ने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि एक घटना के आधार पर पूरे संस्थान या छात्रों की मेहनत पर सवाल उठाना उचित नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि जैसे शिक्षा में वदेशी किताबों का अध्ययन किया जाता है, वैसे ही तकनीक को भी दुनिया भर से लाकर समझा और विकसित किया जाता है. विश्वविद्यालय का उद्देश्य देश की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि छात्रों को बेहतर अवसर देना है. अंत में उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी और विश्वविद्यालय जिम्मेदारी के साथ आगे भी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में कार्य करता रहेगा.

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