UP Politics 2027 Strategy: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों पर्दे के पीछे बहुत कुछ पक रहा है. यूपी में सियासी समीकरणों को साधने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मोर्चा संभाल लिया है. बुधवार रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संघ प्रमुख मोहन भागवत से 35 मिनट की लंबी चर्चा हुई. इस बीच आज गुरुवार सुबह दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी संघ प्रमुख से 15-15 मिनट की मुलाकात की. सीएम योगी आदित्यनाथ के बाद दोनों डिप्टी सीएम के साथ संघ प्रमुख की इस मुलाकात को बेहद माना जा रहा है.
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इन 5 बड़े मुद्दों पर हुआ फीडबैक
सूत्रों की मानें तो संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीते कुछ समय से चर्चा में रहे यूजीसी बिल, शंकराचार्य मुक्तेश्वरआनंद विवाद और मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण मामले को लेकर तीनों नेताओं से अलग-अलग फीडबैक लिया है. इस दौरान 2027 चुनाव के पहले संघ संगठन और सरकार की तैयारी पर भी यह बातचीत हुई. वहीं आने वाले दिनों में यूपी बीजेपी और सरकार में होने वाले बदलाव पर भी चर्चा के संकेत हैं. माना जा रहा है कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठन की नई टीम पर भी चर्चा हुई है. सूत्रों की मानें तो RSS से लेकर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव में 2024 के लोकसभा चुनाव की गलतियों को दोहराना नहीं चाहता है. यही वजह है कि संघ इस बार जमीन पर हाइपरएक्टिव होगा. जिस तरीके से 2024 पार्लियामेंट चुनाव के बाद संघ ने अपनी ताकत महाराष्ट्र ,हरियाणा और बिहार में दिखाई है अब संघ 27 को लेकर अपनी भूमिका तय कर सकता है. हालांकि मोहन भागवत ने साफ कर दिया है कि वे बीजेपी को रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाते बल्कि हिंदुओं के एजेंडे पर चलने वाले सभी दल उनके लिए समान हैं.
डैमेज कंट्रोल के लिए बीजेपी कर रही ये काम?
संघ प्रमुख से मुलाकात से ऐन पहले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों का सम्मान करना एक बड़ा सियासी संदेश माना जा रहा है. अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार पर 'ब्राह्मण विरोधी' होने का आरोप लगा रहे हैं. ऐसे में ब्रजेश पाठक का बटुकों के सम्मान में आगे आना और केशव मौर्य का शंकराचार्य के समर्थन में खड़े होना बीजेपी की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिससे विपक्ष के हाथों से ब्राह्मण कार्ड छीना जा सके.
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