UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त सियासी संग्राम देखने को मिला. मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ. संजय निषाद और समाजवादी पार्टी के विधायकों के बीच तीखी बहस इस कदर बढ़ी कि सपा सदस्य विरोध करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए. आरोप है कि इस दौरान सपा विधायकों और निषाद पार्टी के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई और मंत्री के हाथ से कागज छीनने की कोशिश की गई.
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डॉ. निषाद का सपा-कांग्रेस पर तीखा प्रहार
चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. निषाद ने बजट की सराहना की. लेकिन जल्द ही उनका रुख सपा और कांग्रेस की ओर आक्रामक हो गया. उन्होंने कहा, "निषाद समुदाय ने अंग्रेजों और मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 साल से इन बेईमानों से भी लड़ रहे हैं. दाहिने बैठे सपा के लोगों ने 30 साल की सत्ता में मछुआ समाज के लिए एक रुपया नहीं दिया. केंद्र ने 67 साल में 3000 करोड़ दिए, लेकिन यूपी की पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया."
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विभाग में एक मछुआ पद हुआ करता था जिसे उर्दू अनुभाग में भर्ती कर दिया गया. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "क्या निषाद या मछली उर्दू पढ़ती है? ये लोग मछुआरों के मगरमच्छ हैं."
जातिसूचक शब्द पर घेरा, मुकदमे की चेतावनी
मंत्री ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि पिछली सरकारों में केवट, मल्लाह और बिंद कहकर लोगों को प्रताड़ित किया जाता था. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए एक शब्द पर आपत्ति जताई. डॉ. निषाद ने कहा, "अपने नेता से कहिए माफी मांगें, वरना एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा."
वेल में हंगामा और हाथापाई
मंत्री के कड़े तेवरों के बीच सपा सदस्य वेल में आ गए. हंगामा बढ़ता देख पीठ ने मंत्री को अपनी बात खत्म करने का निर्देश दिया, लेकिन डॉ. निषाद बोलते रहे. इसी बीच कुछ सपा विधायक मंत्री की तरफ बढ़े और उनके हाथ से कागज छीन लिए. संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री पर हमले की कोशिश बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यही सपा का असली आचरण है.
फिर विधानसभा अध्यक्ष ने संभाला मोर्चा
सदन में बढ़ते तनाव और हाथापाई की स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को खुद कमान संभालनी पड़ी. उन्होंने सदन में आकर दोनों पक्षों को शांत करवाया और निर्देश दिया कि सदन की गरिमा के अनुरूप कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दिया जाए.
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