नोएडा के नाले में डूबकर मरने से ठीक पहले 27 साल के इंजीनियर युवराज ने पिता राजकुमार को किया था कॉल! क्या हुई थी बात?

Engineer yuvraj noida: ग्रेटर नोएडा में 27 साल के एक इंजीनियर युवराज की करीब 30 फीट गहरे पानी से भरे बेसमेंट में गिरने से मौत हो गई है. युवराज की मौत के बाद उसके पिता ने उस रात का आखों देखा हाल बताते हुए सिस्टम पर लापरवाही का भी आरोप लगाया है. युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि जब उनका बेटा डूब रहा था तब रेस्क्यू टीम सिर्फ किनारे खड़े होकर तमाशा देख रही थी.

Yuvraj and his father

Yuvraj and his father

अरुण त्यागी

19 Jan 2026 (अपडेटेड: 19 Jan 2026, 11:36 AM)

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Engineer yuvraj noida: ग्रेटर नोएडा में 27 साल के एक इंजीनियर युवराज की करीब 30 फीट गहरे पानी से भरे बेसमेंट में गिरने से मौत हो गई है. यह घटना उस वक्त हुई जब युवराज अपने ऑफिस से घर लौट रहा था. इस दौरान घना कोहरा और रास्ते में बैरिकेडिंग ना होने की वजह से उसकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के पानी से लबालब भरे करीब 30 फीट गहरे बेसमेंट में जा गिरी. लेकिन युवराज ने हार नहीं मानी. वह कार से निकलकर उसकी छत पर चढ़ गया. वह छत पर लेट गया ताकि बैलेंस न बिगड़े. वह डेढ़ घंटे तक हेल्प-हेल्प चिल्लाता रहा. मौके पर बेबस पिता राजकुमार मेहता पहुंचे,पुलिस पहुंची और फायर ब्रिगेड भी. कई घंटों तक युवराज सिर्फ मदद का इंतजार करता रहा. लेकिन इसके बावजूद भी उसे मदद नहीं मिली और उसकी मौत हो गई. आंखों के सामने जवान बेटे को तड़पता देख एक पिता पर क्या गुजरी होगी इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. यूपी Tak से बात करते हुए बेबस पिता ने वो दर्दनाक कहानी बयां की.

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'पापा मुझे बचा लो'

युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि उनके पास रात करीब 12 बजे एक फोन आया. ये फोन किसी और का नहीं बल्कि उनके बेटे युवराज का था. युवराज ने फोन पर बात करते हुए कहा कि 'पापा मैं नाले में गिर गया हूं, मुझे बचा लो.' यह सुनते ही वह बाहर की तरह भाग पड़े. लेकिन करीब 40 मिनट के बाद वह युवराज को खोज पाए. जब उन्होंने युवराज को देखा तो वह कार की छत पर लेटा था ताकि बैलेंस न बिगड़े. तबतक पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर तो पहुंच गईं थी. लेकिन उनके पास ना तो नाव थी और न ही कोई गोताखोर.

पिता राजकुमार मेहता ने लगाए ये आरोप

युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान रेस्क्यू टीम के लोग किनारे खड़े होकर तमाशा देखते रहे. जब उन्होंने अंदर जाने को कहा तो जवाब दिया कि 'पानी बहुत ठंडा है और नीचे सरिया है हम अपनी जान जोखिम में नहीं डालेंगे. उनकी टीम में किसी को तैरना तक नहीं आता था.' इस दौरान एक डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगाई.  मोनिंदर ने बताया कि उसने खुद कमर पर रस्सा बांधा और रात के पौने दो बजे 50 मीटर गहरे पानी में उतरा. मोनिंदर ने करीब 30 मिनट तक युवराज को ढूंढा. लेकिन तब तक युवराज और उसकी गाड़ी पानी की गहराई में समा चुके थे.पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि एसडीआरएफ की टीम सुबह 4 बजे आई. उन्हें बोट उतारने के लिए स्लोप बनाने में 2 घंटे लग गए. सुबह 6 बजे मेरे बेटे की लाश निकली. अगर रात में कोई तैरकर चला जाता तो मेरा बेटा आज जिंदा होता.'

अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी

राजकुमार मेहता ने बताया कि महज दो सप्ताह पहले ही उसी जगह पर एक ट्रक गिरा था. इसके बावजूद नोएडा अथॉरिटी या बिल्डर ने उस खतरनाक रूट को बंद नहीं किया और न ही कोई बैरिकेडिंग लगाई. बिल्डर की लापरवाही और अथॉरिटी की सुस्ती ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया. इस दर्दनाक हादसे के बाद जब बवाल बढ़ा तो नोएडा प्राधिकरण ने आनन-फानन में जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.साथ ही लोटस बिल्डर और संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. लेकिन सवाल आज भी खड़ा है कि क्या नोएडा जैसे आधुनिक शहर की रेस्क्यू टीम इतनी अक्षम है कि उनके पास एक लाइफ जैकेट,नाव या तैराक तक मौजूद नहीं था? क्या सस्पेंशन की ये कागजी कार्रवाई उस पिता का बेटा लौटा पाएगी?