ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने हैबिटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर को थमाया कारण बताओ नोटिस, गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे

यूपी तक

• 09:39 PM • 26 Apr 2025

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने टेकज़ोन-04 स्थित हैबिटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर गंभीर अनियमितताओं के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किया है. जानिए क्या हैं आरोप और आगे क्या कार्रवाई हो सकती है.

Greater Noida Authority issues show-cause notice to Habitech Infrastructure

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ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने हैबिटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को गंभीर अनियमितताओं के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है. यह नोटिस GH-08A, सेक्टर टेकज़ोन-04, ग्रेटर नोएडा स्थित प्रोजेक्ट को लेकर जारी किया गया है. यह कार्रवाई हैबिटेक पंचतत्व अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों की शिकायतों के आधार पर की गई है. शिकायत के अनुसार, फेज 2 के नक्शे में अवैध संशोधन किया गया, आम क्षेत्रों का अनाधिकृत उपयोग हुआ और बिना अधिभोग प्रमाण पत्र (OC) के फ्लैट्स का कब्जा दिया गया.

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हैबिटेक पंचतत्व अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्य रूप से ये चार आरोप लगाए हैं. 

  1. संशोधित सैंक्शन मैप का दुरुपयोग: कंपनी पर फेज-2 के लिए संशोधित सैंक्शन मैप का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है, जिससे फेज-1 के मालिकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं.
  2. बिल्डिंग रेगुलेशन का उल्लंघन: आरोप है कि कंपनी ने 2010 के यूपी अपार्टमेंट एक्ट और बिल्डिंग रेगुलेशन का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) प्राप्त किया.
  3. अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR): कंपनी ने फेज-1 में 28306 वर्ग मीटर की जगह पर 0.75 की अनुमति से अधिक FAR का उपयोग किया.
  4. प्रमोटर का प्रोजेक्ट में हस्तक्षेप: नोटिस में यह भी कहा गया कि प्रमोटर को प्रोजेक्ट में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि यह कार्य मालिकों की सहमति से होना चाहिए था.

यहां नीचे देखिए नोटिस

प्राधिकरण ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि हैबिटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने उक्त परियोजना में CRC Homes Pvt. Ltd. के साथ मिलकर कार्य किया है, और दोनों कंपनियों के कार्यों पर सवाल उठाए गए हैं. GNIDA ने कंपनी को 3 कार्य दिवसों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. समय पर जवाब न देने पर निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सकती है.