Digital Arrest Case: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में साइबर बुलिंग और मानसिक उत्पीड़न की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है. ऑनलाइन ठगों के जाल में फंसी 28 साल की मोनिका ने अपनी जान दे दी. सामने आई जानकारी के मुताबिक मोनिका की मौत के बाद जब उसके घर वाले उसका अंतिम संस्कार कर रहे थे तब भी ठग वीडियो कॉल कर पुलिस की वर्दी में धमकियां दे रहे थे.
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डिजिटल अरेस्ट के चक्कर में मोनिका ने दे दी अपना जान
कोतवाली शहर के गांव फरीदपुर भोगी की रहने वाली 28 साल की मोनिका ने 27/28 अप्रैल की रात अपने कमरे में जान दे दी. इस घटना के वक्त मोनिका की दो बेटियां कमरे में सो रही थीं. सुबह जब बच्चियों की आंख खुली तो मां को देख उनकी चीख निकल गई. शुरुआत में परिजनों ने बिना पुलिस को बताए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. लेकिन श्मशान घाट पर ही मोनिका के मोबाइल पर लगातार कॉल्स आने लगीं. जब भतीजे ने फोन उठाया तो वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा. उसने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए मोनिका से बात कराने को कहा और मना करने पर जेल भेजने की धमकी दी.
मोनिका की आखिरी नोट से ये सब पता चला
घर की तलाशी के दौरान एक डायरी से सुसाइड नोट मिला जिसमें मोनिका ने अज्ञात युवक द्वारा डराने-धमकाने और ब्लैकमेल करने की बात लिखी थी. मोबाइल चेक करने पर पता चला कि ठगों ने व्हाट्सएप पर उसे डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर तस्करी जैसे झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी थी. मौत के बाद भी ठगों का हौसला इतना बुलंद था कि वे उसके पति को भी जेल भेजने की धमकी देते रहे. मृतका के पति रणधीर की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस मोबाइल चैट्स और सुसाइड नोट के आधार पर साइबर अपराधियों के सिंडिकेट का पता लगा रही है.
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