Barabanki News: तहसील रामनगर क्षेत्र के तपेशिपाह के कोरिन पुरवा के पास घाघरा नदी के किनारे 1.5 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य अब हो रही बारिश के चलते बढ़ते जलस्तर के बीच अपनी पहली परीक्षा से गुजर रहा है. शुक्रवार को घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण नदी का पानी उस स्थान तक पहुंच गया, जहां कटान रोकने के लिए जियो बैग, एसी बैग और परकोपाइन लगाए गए हैं. बताया जा रहा है कि नदी का जलस्तर प्रति घंटे लगभग एक सेंटीमीटर की दर से बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है.
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बाढ़ खंड विभाग द्वारा चौघड़िया के पास करीब 450 मीटर क्षेत्र में एसी बैग लगाए गए हैं. इसके अलावा हजारों जियो बैग और 460 परकोपाइन लगाकर नदी की धारा को नियंत्रित करने तथा गांव को कटान से बचाने के लिए सुरक्षा कार्य कराया गया है. यह पूरा कार्य अब पूर्ण हो चुका है और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच इसकी प्रभावशीलता पर सभी की नजर बनी हुई है.
ग्रामीण राजित राम, अवधेश कुमार सहित अन्य लोगों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ राहत एवं कटानरोधी कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद घाघरा नदी का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाता। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ते ही गांव के लोगों में दहशत का माहौल बन जाता है और कटान की आशंका फिर से बढ़ जाती है.
बाढ़ खंड अधिकारी शशिकांत सिंह ने बताया कि करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से यह बाढ़ सुरक्षा कार्य पूरा कराया गया है. विभाग लगातार नदी के जलस्तर और सुरक्षा कार्यों की निगरानी कर रहा है. आवश्यकता पड़ने पर स्थिति के अनुसार आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
फिलहाल घाघरा नदी का पानी सुरक्षा कार्य स्थल तक पहुंच चुका है. ऐसे में ग्रामीणों और प्रशासन की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बढ़ते जलस्तर के बीच यह बाढ़ सुरक्षा कार्य गांव को कटान और बाढ़ के खतरे से कितनी प्रभावी ढंग से बचा पाता है.
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