Dhananjay Singh On Umashankar Singh Death: बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक और मायावती के बेहद करीबी माने जाने वाले उमाशंकर सिंह का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया है. उनके लखनऊ स्थित आवास पर उनका पार्थिव शरीर पहुंचते ही समर्थकों और बड़े-बड़े नेताओं का हुजूम उमड़ पड़ा है. मायावती और बाहुबली नेता धनंजय सिंह समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें अंतिम विदाई दी है. धनंजय सिंह ने उनके निधन को न सिर्फ बसपा, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बहुत बड़ी क्षति बताया है.
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लखनऊ आवास पर जुटी भीड़
गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में अंतिम सांस लेने के बाद, जैसे ही उमाशंकर सिंह का पार्थिव शरीर उनके लखनऊ स्थित घर पर पहुंचा, उनके समर्थकों की भीड़ इकट्ठा होने लगी. हर तरफ सन्नाटा और मायूसी छाई हुई थी. सिर्फ बलिया के रसड़ा में ही नहीं, बल्कि लखनऊ में भी उमाशंकर सिंह की काफी लोकप्रियता थी. उनके समर्थक उनके अंतिम दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए.
मायावती ने भावुक होकर दी विदाई
बसपा सुप्रीमो मायावती भी अपने मुंह बोले भाई उमाशंकर सिंह को श्रद्धांजलि देने उनके घर पहुंचीं. मायावती ने बताया कि उमाशंकर सिंह उन्हें अपनी सगी बहन का दर्जा देते थे और हर रक्षाबंधन पर उनसे मिलने आते थे. बेहद भावुक नजर आ रही मायावती ने इस मौके पर यह भी ऐलान किया कि अगर उनका परिवार चाहेगा, तो वह उनके बेटे को राजनीति में जरूर लाएंगी.
धनंजय सिंह ने बताया बड़ी क्षति
बाहुबली नेता धनंजय सिंह भी उमाशंकर सिंह के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने भाजपा विधायक दिनेश प्रताप सिंह से भी मुलाकात की. धनंजय सिंह कहा कि उमाशंकर जी बहुत ही लोकप्रिय और सज्जन नेता थे. उनका अपने क्षेत्र और जनता के प्रति बहुत गहरा कमिटमेंट था. धनंजय सिंह ने बताया कि उनका उमाशंकर सिंह के साथ करीब 25-30 वर्षों का साथ रहा है और उनके जाने से समाज और बहुजन समाज पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है.
'पक्ष-विपक्ष नहीं, समाज के लिए काम किया'
धनंजय सिंह ने आगे कहा कि राजनीति में विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन कभी आपसी कटुता नहीं होनी चाहिए. उमाशंकर सिंह इसी सोच वाले व्यक्ति थे. उन्होंने हमेशा बहुजन समाज पार्टी के विचारों का साथ दिया, लेकिन उनके संबंध सभी दलों के नेताओं से अच्छे थे. यही वजह है कि आज दलीय बंधनों से ऊपर उठकर हर पार्टी के नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं. धनंजय सिंह ने 55 साल की उम्र में उनके निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया.
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