UP Election 2027: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 30 अगस्त को होने वाली इंडिया गठबंधन की अहम बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है. अखिलेश यादव ने कहा है कि उनका कोई दूसरा कार्यक्रम है और उनकी जगह पार्टी के अन्य नेता इस बैठक में हिस्सा लेंगे. चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाई गई इस बैठक में अखिलेश यादव के शामिल न होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अखिलेश यादव इस बैठक से इसलिए बच रहे हैं ताकि उन्हें कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग को लेकर किसी भी दबाव का सामना न करना पड़े. अखिलेश यादव फिलहाल सीट शेयरिंग पर बात करने से बच रहे हैं, जबकि कांग्रेस जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा चाहती है.
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सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस का बढ़ता दबाव
कांग्रेस पार्टी लगातार समाजवादी पार्टी पर दबाव बना रही है कि उत्तर प्रदेश में जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा तय हो जाए. कांग्रेस के नेता इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम जैसे बड़े चेहरे सपा से अक्टूबर तक सीट शेयरिंग का फार्मूला साफ करने की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस चाहती है कि सपा उनके साथ टेबल पर बैठे और तय करे कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा. वहीं, दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के प्रवक्ताओं को भी निर्देश दिया है कि वे कांग्रेस के साथ गठबंधन या सीट शेयरिंग पर किसी भी तरह की बयानबाजी न करें.
सपा और कांग्रेस के बीच क्या है असली पेंच?
समाजवादी पार्टी का मानना है कि कांग्रेस को पहले अपने जिताऊ उम्मीदवारों के नाम और उन मजबूत सीटों की सूची देनी चाहिए जहां उनका संगठन अच्छा है. सपा चाहती है कि कांग्रेस यह बताए कि वह किन-किन सीटों पर जीतने की स्थिति में है, उसके बाद ही कोई बातचीत होगी. सपा इस मामले को चुनाव की घोषणा होने तक टालना चाहती है. इसके विपरीत, कांग्रेस का मानना है कि 2027 के चुनाव में राहुल गांधी के चेहरे का असर होगा और उसी के आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा. कांग्रेस यह बताने के मूड में नहीं है कि उनका उम्मीदवार कौन होगा या वे कहां मजबूत हैं.
बैठक से अखिलेश ने क्यों बनाई दूरी?
इंडिया गठबंधन की यह बैठक मुख्य रूप से ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के एकतरफा फैसलों के खिलाफ बुलाई गई है, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे दिग्गज नेता शामिल होंगे. अखिलेश यादव को लगता है कि यदि वे इस बैठक में जाते हैं, तो मुख्य मुद्दे से ध्यान हटकर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर चला जाएगा. ऐसे में गठबंधन के बड़े नेता उन पर जल्द से जल्द सीट शेयरिंग के लिए दबाव बना सकते हैं. इसलिए, अखिलेश यादव ने खुद को इस बैठक से दूर रखना ही बेहतर समझा है ताकि वे अभी अपने उम्मीदवारों और पार्टी की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें.
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