Bareilly News: बरेली जंक्शन को आधुनिक और स्मार्ट बनाने के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है. यात्रियों को सुविधाओं के बजाय अव्यवस्था और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्टेशन पर लगाई गई लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
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स्टेशन की बदहाल स्थिति का सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग यात्रियों पर पड़ रहा है. कई बार बुजुर्ग यात्रियों को उनके परिजन कंधों या पीठ पर बैठाकर सीढ़ियां चढ़ाते दिखाई देते हैं. प्लेटफॉर्म संख्या एक से छह को जोड़ने के लिए बनाए गए ओवरब्रिज तक पहुंचने में भी यात्रियों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. इससे छोटे बच्चों, महिलाओं और मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
महिला सुरक्षा के नाम पर भी व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर पेयजल की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. कई स्थानों पर टूटी टोटियों से लगातार पानी बह रहा है, जिससे पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. महिला सुरक्षा के नाम पर भी व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही हैं. प्लेटफॉर्म संख्या एक पर मिशन शक्ति के तहत स्थापित महिला हेल्प डेस्क अक्सर खाली रहती है या वहां ताला लटका रहता है. ऐसे में महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
शिकायत करने के बावजूद रेलवे अधिकारी समस्या को कर रहे नजरअंदाज
स्थानीय यात्रियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद रेलवे अधिकारी इस समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं. तेज धूप, बारिश और सर्दी में खुले प्लेटफॉर्म बदलने के दौरान यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे के आधुनिकीकरण के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का यह अंतर यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है.
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