Ballia Sanjay Singh AAP News: उत्तर प्रदेश के बलिया में एक तरफ सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती लेकिन बलिया का एक गांव आज भी विकास के नाम पर अंधकार में है. यह कोई साधारण गांव नही, बल्कि उसी निर्भया का गांव है जिसके नाम पर पूरे देश मे महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के कानून बने. लेकिन विडंबना देखिए, निर्भया के गांव मेड़वरा कलां में बना दामनी अस्पताल आज खुद बदहाल है और वहां तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नही है.
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बलिया पहुंचे आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और सांसद संजय सिंह के प्रतिनिधि सर्वेश मिश्रा ने पूर्व और वर्तमान सरकार पर जमकर निशाना साधा. इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस पर किया जहां गांव के विकास की लड़ाई लड़ रही बालिका बंधुता मंच की छात्राएं भी मौजूद रही. मंच से जुड़ी छात्राओं ने सरकार पर तीखे हमले किए मंच की एक छात्रा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, हम इसे सड़क नहीं, गड्ढा कहते हैं. हालात इतने खराब है कि वहां मछली पालन किया जा सकता है. हम पिछले 5 साल से पदयात्रा कर रहे है. डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई कहीं नहीं हुई. बताई बरसात के दिनों में मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच सकता, बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सकते.
अस्पताल है या जंगल?
सिर्फ सड़क नहीं दामिनी अस्पताल की स्थिति तो और भी भयावह है. बताया अस्पताल परिसर में झाड़ियां और जंगल उग आए है. जो आवास बने, उनका ताला कभी खुला ही नहीं. अस्पताल की पानी की टंकी कभी चालू ही नहीं हुई. आरोप है कि डॉक्टर अस्पताल में इलाज के लिए नहीं बल्कि छुट्टी मनाने संडे टू संडे आते हैं. बारिश होते ही हफ्तों के लिए गायब हो जाते हैं.
पैसा नहीं है तो बताएं, हम चंदा जुटा लेंगे
इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश मिश्रा ने कहा कि हमारे सांसद संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कर कड़ा रुख अपनया है, उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सरकार के पास फंड की कमी है तो वह बताएं, सांसद ने कहा है कि वह दिल्ली के सांसद जरूर है लेकिन जनता के हक के लिए चंदा इकट्ठा करके खुद इस सड़क का निर्माण करवा देंगे.
छात्राओं का हौसला, सिस्टम की बेरुखी
जब गांव के प्रतिनिधि और नेता वादे करके गायब हो गए, तब वहां की बेटियों ने बालिका बंधुता मंच बनाया. ये छात्राएं न केवल अपनी पढ़ाई कर रही है बल्कि अपने गांव और अस्पताल की बदहाली के खिलाफ सड़क पर उतर कर लंबी लड़ाई लड़ रही है. सवाल अभी वही है, क्या निर्भया के सम्मान में बना अस्पताल सिर्फ कागजों पर ही रहेगा? क्या बलिया के जिम्मेदार नेता और प्रशासन तब जागेंगे जब यह छात्राएं आंदोलन को और उग्र करेंगी.
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