Ballia News: न्यायालय के आदेश के बावजूद जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित ने पुलिस पर मिलीभगत का लगाया आरोप

Newzo

• 05:27 PM • 13 Jul 2026

Ballia Land Dispute News: बलिया में एक व्यक्ति ने न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद जमीन पर अवैध कब्जा कराने का आरोप लगाया है. पीड़ित ने पुलिस पर विपक्षी पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच, न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

न्यायालय के आदेश के बावजूद जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित ने पुलिस पर मिलीभगत का लगाया आरोप

न्यायालय के आदेश के बावजूद जमीन पर कब्जे का आरोप, पीड़ित ने पुलिस पर मिलीभगत का लगाया आरोप

Google CTA

Ballia News: जनपद के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने न्यायालय के आदेश के बावजूद अपनी जमीन पर अवैध कब्जा कराए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पीड़ित ने प्रशासन से न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने तथा मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है.

यह भी पढ़ें...

गोपालपुर निवासी रामसूरत वर्मा ने बताया कि 22 जुलाई 1993 को हरदेव वर्मा पुत्र विशुन दयाल वर्मा, निवासी तपनी (थाना सुखपुरा) ने उनके और उनकी पत्नी शारदा देवी के नाम विधिवत पंजीकृत हिबा (दान) के माध्यम से भूमि हस्तांतरित की थी. यह भूमि मौजा तपनी स्थित विभिन्न आराजी एवं गाटा संख्याओं में दर्ज है.

रामसूरत वर्मा का आरोप है कि बाद में हरदेव वर्मा ने उसी भूमि का 1 नवंबर 2002 को जानकी देवी पत्नी शंभूनाथ वर्मा, निवासी रामपुर उदयभान, के नाम विक्रय कर दिया. इस मामले को लेकर उन्होंने वर्ष 2003 में सिविल जज (जूनियर डिवीजन), पश्चिमी बलिया की अदालत में वाद संख्या 300/2003 (रामसूरत बनाम जानकी) दाखिल किया.

पीड़ित के अनुसार, न्यायालय ने 31 मई 2003 को आदेश पारित करते हुए मुकदमे के अंतिम निस्तारण तक संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने तथा फसल को नुकसान न पहुंचाने का निर्देश दिया था. उनका दावा है कि यह आदेश आज भी प्रभावी है.

इसके बावजूद रामसूरत वर्मा ने आरोप लगाया है कि थाना सुखपुरा के प्रभारी निरीक्षक रत्नेश कुमार दुबे एवं एक पुलिसकर्मी पर विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर उनकी भूमि पर जबरन कब्जा कराने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में पुलिस अधीक्षक समेत उच्च अधिकारियों को भी शिकायत दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.

पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए.