सावन के पहले दिन अयोध्या में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब, क्षीरेश्वर नाथ और नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए लगी लंबी कतारें

यूपी तक

• 12:18 PM • 30 Jul 2026

Sawan 2026: सावन के पहले दिन अयोध्या के नागेश्वरनाथ और सिद्ध क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. भगवान शिव के जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.

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Sawan 2026: सावन महीने के पहले दिन रामनगरी अयोध्या पूरी तरह से 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज रही है. नागेश्वरनाथ और प्रसिद्ध क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. सावन की शुरुआत के साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज से आए शिव भक्त और कांवड़िए मंदिरों में पहुंच रहे हैं. अयोध्या के सिद्ध क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. यह मंदिर राजा दशरथ से जुड़े पौराणिक इतिहास के लिए भी जाना जाता है. 

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राजा दशरथ ने की थी पूजा

क्षीरेश्वर नाथ मंदिर की पौराणिक और धार्मिक मान्यता बहुत बड़ी है. मंदिर के संतों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए इसी मंदिर में भगवान शिव की पूजा की थी. उन्होंने यहां भोलेनाथ का दूध और खीर से अभिषेक किया था, जिसके बाद उन्हें भगवान राम सहित चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी. यह एक प्राचीन और सिद्ध स्थान माना जाता है, जहां सावन के महीने में दूध और जल चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

दूर-दराज से पहुंचे शिव भक्त

सावन के पहले ही दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी. पश्चिम बंगाल से पैदल यात्रा करके आए कांवड़ियों ने भी राम मंदिर और नागेश्वरनाथ के दर्शन के बाद क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में जल चढ़ाया. दूर-दूर से आए भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर अपने और अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना कर रहे हैं. मंदिर के बाहर बेलपत्र, फूल और प्रसाद बेचने वालों के पास भी सुबह से भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है.

अनुष्ठान और मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर

सावन महीने की शुरुआत के साथ ही मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप शुरू हो गए हैं. मंदिर के पुजारियों के अनुसार, सिद्ध स्थान होने के कारण सावन में यहां किया गया पूजा-पाठ और अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है. मंदिर परिसर में पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार कराया जा रहा है और श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जल, पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर रहे हैं.