अमेठी में दलित युवक खुशीराम को जेल में बंद करके दिया गया करंट का झटका? हैवानियत सुनकर भड़क गए चंद्रशेखर आजाद

अभिषेक त्रिपाठी

29 Mar 2026 (अपडेटेड: 29 Mar 2026, 01:00 PM)

Amethi News: उत्तर प्रदेश के अमेठी में दलित युवक खुशीराम को पुलिस द्वारा 'थर्ड डिग्री' और करंट देने का गंभीर आरोप.चोरी के शक में हिरासत के दौरान युवक की हालत बिगड़ी, भीम आर्मी ने किया जोरदार प्रदर्शन.

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Amethi Police Custody Case: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां के जामो थाना क्षेत्र के अलीपुर गांव के रहने वाले एक दलित युवक खुशीराम को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. परिजनों का आरोप है कि थाने के भीतर खुशीराम को बेरहमी से पीटा गया और उसे बिजली के झटके भी दिए गए जिससे उसकी हालत नाजुक हो गई.

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क्याा है पूरा मामला

मामले की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई जब इलाके में एक ट्रांसफार्मर की बाइंडिंग चोरी हो गई. पुलिस ने शक के आधार पर बिजली विभाग में काम करने वाले खुशीराम को पूछताछ के लिए थाने बुलाया. खुशीराम के भाई संग्राम का कहना है कि जब वे थाने पहुंचे तो पुलिस ने गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया.अगली सुबह फोन आया कि खुशीराम अस्पताल में भर्ती है. पीड़ित खुशीराम ने खुद आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसे थाने में बैठाकर बुरी तरह मारा-पीटा गया. पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने उसे करंट लगाया जिससे वह बेहोश हो गया.

खुशीराम की मां ने रोते हुए बताया कि जब वे शिकायत लेकर पहुंचे तो उन्हें इधर-उधर दौड़ाया गया और कोई कार्रवाई नहीं की गई. घटना की जानकारी मिलते ही भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की. उन्होंने कार्यकर्ताओं से जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों का विवरण मांगा और मामले में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी.

पुलिस बता रही अलग ही कहानी

दूसरी ओर पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. जामो थाना प्रभारी विनोद सिंह का कहना है कि खुशीराम को लकड़ी ले जाते समय गिरने से चोटें आई थीं. पुलिस के मुताबिक युवक को मिर्गी की बीमारी है और पूछताछ के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पुलिस ने मारपीट और करंट लगाने के आरोपों को निराधार बताया है. फिलहाल इलाके में भारी आक्रोश है. भीम आर्मी और स्थानीय लोग दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि बड़े अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं.