Amethi News: जिले में कमजोर मानसून के चलते खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की रोपाई निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है. जुलाई का पहला पखवाड़ा बीतने के बावजूद बड़ी संख्या में खेत अब भी रोपाई का इंतजार कर रहे हैं. बारिश की कमी के कारण किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है.
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कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में 1,30,796 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया था. विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 88,030 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपाई हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का करीब 67 प्रतिशत है. अभी भी 42,766 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई बाकी है.
समय पर मानसून सक्रिय न होने से खेतों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया है. जिन किसानों के पास निजी नलकूप या अन्य सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, वे किसी तरह रोपाई का कार्य पूरा कर रहे हैं, जबकि वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. कई गांवों में धान की बेहन तैयार है, लेकिन खेतों में नमी की कमी के कारण रोपाई शुरू नहीं हो सकी है.
वर्षा के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं. जून माह में जिले में औसतन 93.5 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 25.8 मिमी बारिश दर्ज की गई. वहीं जुलाई में अब तक 299.2 मिमी औसत वर्षा के मुकाबले महज 75.7 मिमी वर्षा हुई है. कम बारिश के कारण खेतों में पानी की कमी बनी हुई है और रोपाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है.
बारिश की कमी का असर किसानों की जेब पर भी पड़ रहा है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने से उन्हें निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है. एक बीघा धान की खेती में खेत की जुताई पर लगभग 1,200 रुपये, बेहन उखाड़ने और रोपाई की मजदूरी पर 4,000 रुपये, खाद पर 1,350 रुपये तथा सिंचाई पर करीब 2,000 रुपये खर्च हो रहे हैं. इस तरह प्रति बीघा धान की प्रारंभिक लागत लगभग 8,550 रुपये तक पहुंच गई है, जो आगे यूरिया की ड्रेसिंग और अतिरिक्त सिंचाई के साथ और बढ़ने की संभावना है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में जिले के किसान जल्द मानसून सक्रिय होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
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