Amethi News: फेसबुक ब्लू टिक, टेलीग्राम टास्क और फर्जी KYC, अमेठी में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

Newzo

• 03:52 PM • 17 Jul 2026

Amethi Cyber Fraud Case: अमेठी में साइबर अपराधियों ने फेसबुक ब्लू टिक, फर्जी KYC, टेलीग्राम टास्क और निवेश के नाम पर ठगी का जाल फैलाया है. 1 अप्रैल 2026 से अब तक 2,652 मामले दर्ज हुए हैं. पुलिस ने 2.70 करोड़ रुपये होल्ड कर जांच तेज कर दी है.

फेसबुक ब्लू टिक, टेलीग्राम टास्क और फर्जी KYC, अमेठी में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

फेसबुक ब्लू टिक, टेलीग्राम टास्क और फर्जी KYC, अमेठी में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

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Amethi News: साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. फेसबुक पर ब्लू टिक दिलाने, बंद ई-मेल दोबारा चालू कराने, टेलीग्राम टास्क, फर्जी निवेश, बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी अपडेट कराने, एपीके फाइल भेजने और मोबाइल चोरी के जरिए बैंक खातों से रकम उड़ाई जा रही है. ठगी की रकम को खपाने के लिए साइबर अपराधी म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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अमेठी जिले में बढ़ते साइबर अपराध के मामलों को लेकर साइबर एसओजी लगातार कार्रवाई कर रही है. आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल 2026 से अब तक जिले में साइबर ठगी के 2,652 मामले सामने आए हैं. इन मामलों में साइबर अपराधियों ने लोगों से करीब 9.58 करोड़ रुपये की ठगी की है.

वर्तमान में साइबर एसओजी 626 मामलों की जांच कर रही है. जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2.70 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि होल्ड कराई है, जिससे पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है.

साइबर एसओजी प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेज और मोबाइल एप के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाते हैं. कई मामलों में मोबाइल चोरी होने के बाद भी बैंक खातों से रकम निकाली गई है. जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी लालच देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाते हैं और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन करते हैं, जिससे मुख्य अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.

अमेठी पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. ने बताया कि साइबर अपराधी हर दिन ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं. लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी और बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें. उन्होंने कहा कि समय पर शिकायत मिलने पर पुलिस और बैंक के सहयोग से ठगी की गई धनराशि को सुरक्षित कराने का प्रयास किया जाता है.