लेखपाल भर्ती के फॉर्म भरने वाले छात्रों का फूटा गुस्सा, आखिरी तारीख से पहले क्रैश हुई वेबसाइट...अब कोर्ट पहुंचा मामला

UP Lekhpal Recruitment: यूपी लेखपाल भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान वेबसाइट सर्वर डाउन होने से हजारों अभ्यर्थी फॉर्म भरने से वंचित रह गए. छात्रों का आरोप है कि अंतिम तारीख से पहले ही साइट क्रैश हो गई और कई लोगों का पेमेंट भी फेल हो गया. अब अभ्यर्थियों ने आवेदन तिथि बढ़ाने और न्याय की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

यूपी तक

• 06:10 PM • 05 Mar 2026

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UP Lekhpal Recruitment: उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. भर्ती के लिए जारी आवेदन प्रक्रिया के दौरान हजारों अभ्यर्थियों का दावा है कि लास्ट डेट से ठीक पहले आयोग की वेबसाइट का सर्वर ठप हो गया जिसकी वजह से वे आवेदन नहीं कर पाए. कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने बार-बार कोशिश की लेकिन वेबसाइट खुल ही नहीं खुली जबकि कुछ के भुगतान भी फेल हो गए. पांच साल बाद आई इस भर्ती से युवाओं को काफी उम्मीदें थीं लेकिन तकनीकी खामियों ने उनकी तैयारी और मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए. परेशान अभ्यर्थियों ने पहले आयोग और सरकार से शिकायत की लेकिन समाधान न मिलने पर अब उन्होंने कोर्ट का रुख किया है. फिलहाल यह पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और छात्र दोबारा आवेदन का मौका मिलने की उम्मीद कर रहे हैं.

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आवेदन से पहले ही ठप हो गई वेबसाइट

छात्रों के अनुसार, यूपी ट्रिपल एससी द्वारा लेखपाल भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन 26 जनवरी के बाद वेबसाइट पर लगातार तकनीकी समस्या आने लगी और 27-28 जनवरी को सर्वर पूरी तरह क्रैश हो गया. अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने दिन-रात कोशिश की लकिन वेबसाइट खुल ही नहीं रही थी.

एक छात्र ने दावा किया कि सिर्फ वही नहीं बल्कि हजारों अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाए. उसके पास ऐसे 5 से 7 हजार छात्रों की जानकारी और स्क्रीनशॉट मौजूद हैं जिनका फॉर्म पूरा नहीं हो सका. कई अभ्यर्थियों ने फीस जमा करने की कोशिश की लेकिन पेमेंट फेल हो गया. छात्रों का कहना है कि यह सिस्टम की बड़ी विफलता है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

पांच साल बाद आई भर्ती, फिर भी नहीं मिला मौका

अभ्यर्थियों का कहना है कि लेखपाल भर्ती लगभग पांच साल बाद आई है. इतने लंबे समय के बाद नोटिफिकेशन आने से छात्रों में उत्साह था लेकिन तकनीकी खामियों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि पांच साल के दौरान बहुत से उम्मीदवार ओवरएज हो गए इसलिए सरकार को आयु सीमा में भी राहत देनी चाहिए थी.

छात्रों का यह भी आरोप है कि सर्वर डाउन होने के बावजूद आवेदन की लास्ट डेट आगे नहीं बढ़ाई गई. अगर कुछ दिनों का अतिरिक्त समय मिल जाता तो कई अभ्यर्थी आवेदन कर सकते थे.

समाधान न मिलने पर कोर्ट पहुंचे छात्र

छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले आयोग और सरकार से शिकायत की. इसके अलावा कई अभ्यर्थी जनता दरबार भी पहुंचे और आवेदन की डेट बढ़ाने की मांग की लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद मजबूर होकर छात्रों के एक समूह ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आयोग और एनआईसी की ओर से यह दलील दी गई कि पेमेंट फेल होने की जिम्मेदारी बैंक की हो सकती है. हालांकि छात्रों का कहना है कि जब आवेदन प्रक्रिया आयोग की वेबसाइट के माध्यम से हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी भी आयोग को ही लेनी चाहिए.

अब कोर्ट से है अंतिम उम्मीद

फिलहाल यह मामला सिंगल बेंच से डबल बेंच में पहुंच गया है और होली की छुट्टियों के कारण सुनवाई में देरी हुई. छात्रों को उम्मीद है कि 10 मार्च के आसपास अगली सुनवाई हो सकती है. अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर कोर्ट उनकी मांग को सही ठहराता है तो आवेदन की तारीख बढ़ाई जा सकती है या उन्हें दोबारा फॉर्म भरने का मौका मिल सकता है. छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और सिर्फ तकनीकी समस्या की वजह से उनका भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए.

भर्ती प्रक्रिया में सुधार की भी मांग

छात्रों ने यह भी मांग उठाई है कि यूपी ट्रिपल एससी को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता लानी चाहिए. उनका कहना है कि आयोग को पहले से परीक्षा कैलेंडर जारी करना चाहिए सिलेबस में बार-बार बदलाव से बचना चाहिए और परीक्षा की संभावित तारीख पहले ही घोषित करनी चाहिए ताकि अभ्यर्थी बेहतर तैयारी कर सकें.

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