कटहरी विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में स्थित है जहां राजनीतिक माहौल काफी रोमांचक और बदलता रहता है. 2024 के उपचुनाव में बीजेपी ने सीट जीतकर यहां अपनी पकड़ मजबूत की थी. लेकिन 2027 के चुनाव में सपा, बसपा और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद है. इस क्षेत्र की सामाजिक संरचना दलित, ब्राह्मण, कुर्मी, मुस्लिम, निषाद और अन्य जातियों से मिश्रित है और ये सभी जातीय समूह चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक के साथ इस सीट पर जीत के लिए प्रयासरत हैं.
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कटहरी विधानसभा क्षेत्र के विकास की बात करें तो पिछले वर्षों में सड़कों के सुधार, पुलों का निर्माण, विद्युत व्यवस्था में सुधार और स्थानीय बुनियादी ढांचे में काफी प्रगति हुई है. क्षेत्र में यातायात और पर्यटन के लिहाज से भी कई विकासात्मक कार्य हुए हैं. विधायक निधि से सैकड़ों सड़कों का निर्माण और हाई मास्ट लाइटिंग के जरिए क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों को बेहतर रोशनी मिल रही है जिससे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां बेहतर हो रही हैं.
राजनीतिक रूप से देखें तो बीते चुनावों में इस क्षेत्र में बीएसपी, सपा और बीजेपी तीनों की अलग-अलग समय पर मजबूत पकड़ देखी गई है. 2024 के उपचुनाव में बीजेपी को मिली जीत ने पार्टी के मनोबल को बढ़ावा दिया है. हालांकि सपा के लालजी वर्मा का प्रभाव और उनके समर्थक अभी भी यहां मजबूत मौजूदगी रखते हैं. बसपा भी दलित वोटरों के दम पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना चाहती है. जातीय समीकरण जैसे दलित, ब्राह्मण, कुर्मी, मुस्लिम, निषाद, यादव और अन्य समुदायों का भी चुनाव परिणामों पर गहरा असर है.
2027 के चुनाव के लिए तीनों समर्थक पार्टियां संगठन स्तर पर तैयारियां कर रही हैं. फिलहाल उम्मीदवारों की घोषणा अभी बाकी है और प्रत्याशियों की अंतिम सूची आने तक चुनावी परिदृश्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा का समर्थन ब्राह्मण और निषाद वोटर मजबूती से मिलता दिख रहा है जबकि सपा का मुख्य आधार यादव एवं मुस्लिम वोट हैं. बसपा दलित वोट बैंक के बोझ तले अपनी जगह बनाने की कोशिश करती नजर आएगी.
कटहरी विधानसभा क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण एवं कृषि प्रधान है जिसमें गन्ने की खेती और चीनी मिलों का बड़ा योगदान है. स्थानीय किसान सिंचाई, गन्ना भुगतान और पशुपालन को चुनावी मुद्दा मानते हैं. इसके अलावा बेरोजगारी और महंगाई जैसे सामान्य समस्याएं भी वोटरों के लिए महत्वपूर्ण हैं. जातीय और सामाजिक समीकरण के कारण यह क्षेत्र हर चुनाव में खासा निर्णायक रहता है.
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