सपा विधायक सचिन यादव के सदन से निष्कासन पर भयंकर भड़क गए अखिलेश यादव!

यूपी तक

• 11:34 AM • 05 Aug 2026

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को हंगामे के बाद निष्कासित कर दिया गया है. इस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव बढ़ गया है. भाजपा ने सदन की मर्यादा बनाए रखना जरूरी बताया है.

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उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है. सदन में हंगामे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर दिखाकर विरोध दर्ज कराने के मामले में समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए निष्कासित कर दिया गया है. इस कार्रवाई के बाद से राज्य में सियासत काफी गरमा गई है. सपा ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया है, जबकि सरकार का कहना है कि सदन की मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना प्राथमिकता है. वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए बीजेपी सरकार पर हमला बोला है.

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सदन में हंगामा और सपा विधायक पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है. सदन की कार्यवाही के दौरान सपा विधायक सचिन यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर हाथ में लेकर विरोध जताने लगे. अध्यक्ष द्वारा व्यवस्था बनाए रखने की अपील के बावजूद जब शोर-शराबा जारी रहा और निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए निष्कासित कर दिया.

'मर्यादा का पालन जरूरी'

कार्रवाई का बचाव करते हुए सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां हर जनप्रतिनिधि को नियमों का पालन करना चाहिए. सरकार का कहना है कि विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है. लेकिन सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है. नियमों का उल्लंघन होने पर ऐसी अनुशासनात्मक कार्रवाई होना स्वाभाविक और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी है.

अखिलेश यादव का तीखा हमला

विधायक सचिन यादव के निलंबन के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर सामने आए. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए. अखिलेश यादव ने लिखा 'भाजपा कुशासन में आम जनता तो छोड़िए, उत्तर प्रदेश विधानसभा तक में विधायकों की अभिव्यक्ति पर आपत्ति करना निंदनीय है. लेकिन उससे भी अधिक निंदनीय यह है कि सदन के बाहर जो सत्ताधारी महिलाओं का अपमान करते हैं, वे सदन में महिला विधायकों से शालीन व्यवहार नहीं करते हैं. जनता तो बस इतना पूछ रही है कि अगर माननीय मुख्यमंत्री जी की बनाई गई एसआईटी ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया था, तो क्या नई एसआईटी पानी का भी पानी करेगी? भाजपा सरकार है या वाटर फिल्टर.'

मुद्दों पर जारी राजनीतिक जंग

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है जिसमें राम मंदिर से जुड़े कथित मुद्दों का मामला भी शामिल है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और आवाज दबाने का काम कर रही है. वहीं, सत्ता पक्ष का दावा है कि विपक्ष सकारात्मक चर्चा में भाग लेने के बजाय केवल हंगामा खड़ा करने की राजनीति कर रहा है.

सपा विधायक के निलंबन के बाद यह मामला अब विधानसभा से निकलकर सोशल मीडिया और राज्य के राजनीतिक गलियारों तक गरमा गया है. एक तरफ सरकार जहां अनुशासन और संसदीय परंपराओं का हवाला दे रही है. वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रही है. दोनों दलों के बीच बढ़ा यह टकराव आगामी दिनों में सत्र की कार्यवाही को और अधिक हंगामेदार बना सकता है.