कौन है विराज उर्फ जितेंद्र पाठक? जिसने 30 सेकंड में डेढ़ साल के आरव को 8 बार जमीन पर पटक-पटक कर मार डाला...

यूपी तक

• 01:53 PM • 11 Jul 2026

Firozabad Aarav Murder Case: फिरोजाबाद के चर्चित आरव हत्याकांड में मृत्युदंड पाने वाले आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक की पूरी कहानी सामने आई है. बदायूं निवासी विराज ने कथित तौर पर एकतरफा प्यार में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या कर दी थी.

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Firozabad Aarav Murder Case: फिरोजाबाद के चर्चित आरव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर वह कौन है, जिसने महज 30 सेकंड में डेढ़ साल के मासूम आरव को आठ बार जमीन पर पटककर मौत के घाट उतार दिया. इस दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया था. अब अदालत के फैसले के बाद विराज की जिंदगी, उसका अतीत और इस जघन्य अपराध के पीछे की वजह चर्चा का विषय बन गई है.

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30 सेकंड में उजड़ गई मासूम की जिंदगी

यह सनसनीखेज वारदात 30 मई 2026 को फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में हुई थी. पुलिस के मुताबिक, आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक मासूम आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर अपनी गोद में ले गया. कुछ ही देर बाद उसने सड़क पर बच्चे को बार-बार पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिसमें आरोपी बच्चे को लगातार जमीन पर पटकता दिखाई दिया. घटना की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि वीडियो सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया गया. सीसीटीवी सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठी और आखिरकार घटना के महज 40 दिन बाद, 10 जुलाई 2026 को जिला अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई.

कौन है विराज उर्फ जितेंद्र पाठक?

जानकारी के मुताबिक, विराज उर्फ जितेंद्र पाठक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला है. वर्ष 2010 में उसके पिता की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी. आर्थिक तंगी के चलते उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई. इसके बाद उसने पहले वैन चलाकर टैक्सी का काम किया और बाद में अपने घर के पास एक छोटी परचून की दुकान खोल ली.

परिवार का दावा है कि पहले उसका स्वभाव सामान्य और शांत था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा था. हालांकि, इस बदलाव की वजह क्या थी, इसका कोई स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है.

एकतरफा प्यार बना मासूम की मौत की वजह

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि विराज बच्चे की मां से शादी करना चाहता था. जांच में यह भी पता चला कि महिला का अपने पति से विवाद चल रहा था और वह अपने डेढ़ साल के बेटे आरव के साथ अलग रह रही थी.

पुलिस के अनुसार, विराज का प्रेम एकतरफा था. जब महिला ने शादी से इनकार किया तो आरोपी ने मासूम बच्चे को अपनी राह का सबसे बड़ा रोड़ा मान लिया. इसी सोच के चलते उसने बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी. जांच एजेंसियों का मानना है कि वारदात के पीछे यही मुख्य वजह थी.

वारदात के बाद भाई को किया फोन

मामले की जांच में यह भी सामने आया कि घटना को अंजाम देने के बाद विराज ने अपने बड़े भाई राजीव को फोन किया था. परिवार का दावा है कि उस समय वह फोन पर लगातार रो रहा था और सिर्फ यही कह रहा था कि "मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है." हालांकि, जांच में इस दावे से हत्या की वजह या आरोपी के पक्ष में कोई राहत देने वाला तथ्य सामने नहीं आया.

कोर्ट में मानसिक स्थिति का बचाव भी नहीं आया काम

सुनवाई के दौरान विराज के पक्ष में केवल उसके बड़े भाई ने गवाही दी. उसने अदालत में आरोपी की मानसिक स्थिति खराब होने का दावा किया और यह भी कहा कि घटना के समय उसने शराब पी रखी थी.

लेकिन अभियोजन पक्ष की जिरह और उपलब्ध सबूतों के आधार पर अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया. कोर्ट ने माना कि आरोपी मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह सामान्य था और उसने पूरी समझ के साथ इस वारदात को अंजाम दिया.

40 दिन में पूरी हुई जांच और सुनाया गया फैसला

घटना के बाद 31 मई से 5 जून के बीच पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की. सीसीटीवी फुटेज समेत तमाम तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटाए गए. महज छह दिन के भीतर पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी.

इसके बाद जून और जुलाई के दौरान जिला अदालत में लगातार सुनवाई चली. अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से सिर्फ आरोपी का भाई गवाह बना. 9 जुलाई 2026 को अदालत ने विराज को दोषी ठहराया और 10 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उसे मृत्युदंड की सजा सुना दी.

फैसले के वक्त कोर्ट में उमड़ी भीड़, आरोपी के चेहरे पर छाई उदासी

अदालत में फैसला सुनाए जाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. सरकारी पक्ष के वकील के मुताबिक, जैसे ही कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई, विराज के चेहरे पर गहरी उदासी साफ दिखाई दे रही थी.

वहीं, आरव की मां ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका का धन्यवाद किया. इस फैसले को तेज जांच और त्वरित न्याय का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. हालांकि, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर मासूम बच्चों की सुरक्षा, महिलाओं के खिलाफ जुनूनी अपराध और ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जरूरत पर गंभीर बहस छेड़ दी है.