30 सेकेंड में डेढ़ साल के मासूम आरव को 8 बार पटका, CCTV ने खोला राज... अब कोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा की उड़ गए होश!

यूपी तक

• 10:54 AM • 11 Jul 2026

Firozabad News: फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की 30 सेकेंड में आठ बार पटककर हत्या करने वाले आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को अदालत ने घटना के महज 40 दिन के भीतर मृत्युदंड की सजा सुनाई है.

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Firozabad News: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में डेढ़ साल के मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने महज 40 दिन के भीतर बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. आरोपी पर आरोप था कि उसने 30 मई 2026 को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में डेढ़ साल के बच्चे को महज 30 सेकेंड के भीतर आठ बार सड़क पर पटक-पटक कर उसकी हत्या कर दी थी. यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी, जिसका वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए फास्ट ट्रैक सुनवाई हुई और 11 जुलाई को अदालत ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई.

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कोर्ट में सजा सुनते ही चेहरे पर छा गई उदासी

मामले में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि अदालत में फैसला सुनाए जाने के समय अभूतपूर्व भीड़ मौजूद थी. उनके अनुसार, अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने पहली बार किसी फैसले के दौरान अदालत में इतनी भीड़ देखी. जैसे ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को मृत्युदंड सुनाया, उसके चेहरे पर गहरी उदासी साफ दिखाई दे रही थी. राजीव प्रियदर्शी का कहना है कि उस समय ऐसा महसूस हो रहा था कि आरोपी को अपने जघन्य अपराध और उसके परिणाम का एहसास हो चुका था.

6 दिन में चार्जशीट, 13 गवाहों के बयान और तेज सुनवाई

राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि इस मामले में प्रशासन और पुलिस ने बेहद तेजी से कार्रवाई की. पुलिस ने घटना के केवल छह दिनों के भीतर सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य जुटाकर आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया. इसके बाद अभियोजन पक्ष ने भी छह दिनों के भीतर 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए. उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के लगातार निर्देशों के कारण इस जघन्य मामले की सुनवाई में तेजी लाई गई और गवाहों ने भी पूरी ईमानदारी के साथ अदालत में अपने बयान दर्ज कराए.

बचाव पक्ष ने मानसिक स्थिति का तर्क दिया

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित करने की कोशिश की. आरोपी के रिश्तेदार को गवाह के तौर पर पेश कर यह दावा किया गया कि घटना के समय वह मानसिक रूप से ठीक नहीं था और शराब के नशे में था. हालांकि अभियोजन पक्ष की जिरह में यह दावा टिक नहीं पाया. अदालत के सामने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था.

शादी की चाहत और मासूम बना रास्ते की रुकावट

जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, मृतक बच्चे की मां का अपने पति से कानूनी विवाद चल रहा था और वह अपने डेढ़ साल के बेटे के साथ अलग रह रही थी. आरोप है कि विराज उर्फ जितेंद्र पाठक महिला से शादी करना चाहता था, लेकिन उसे बच्चा अपने रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट लगता था. इसी वजह से उसने वारदात की साजिश रची. आरोप के मुताबिक, घटना वाले दिन जब महिला अपने एक रिश्तेदार के घर गई थी, तब आरोपी टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर मासूम आरव को अपने साथ ले गया और कुछ ही देर बाद उसे सड़क पर कई बार पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया.

सीसीटीवी फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत, पूरे प्रदेश में उठा था सख्त सजा का मुद्दा

इस हत्याकांड का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला था. वीडियो में आरोपी की क्रूरता साफ दिखाई देने के कारण पूरे प्रदेश में उसे कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठी. अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद घटना के महज 40 दिनों के भीतर फैसला सुनाते हुए आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई. इस फैसले को तेज और प्रभावी न्याय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है.