मेरठ हत्याकांड ने बढ़ाई दलित राजनीति की गर्मी! मायावती के बयान पर चंद्रशेखर का पलटवार, छिड़ी नई बहस

यूपी तक

• 02:56 PM • 10 Jul 2026

मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. एक ओर मायावती ने सड़क पर आंदोलन के बजाय कानूनी लड़ाई की वकालत की, तो दूसरी ओर चंद्रशेखर आजाद ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्याय के लिए संघर्ष जरूरी है.

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Meerut Lalita Gautam Murder Case: मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है. एक ओर भीम आर्मी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने विरोध प्रदर्शनों के तरीके पर सवाल उठाते हुए कानून के दायरे में रहकर न्याय की लड़ाई लड़ने की नसीहत दी है. मायावती के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई है कि दलित समाज की लड़ाई का सही रास्ता कौन सा है, सड़क पर संघर्ष या अदालत के जरिए न्याय. इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के समर्थक भी आमने-सामने आ गए हैं.

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मायावती ने सड़क पर आंदोलन के बजाय कानूनी लड़ाई पर दिया जोर

ललिता गौतम हत्याकांड के बाद हो रहे प्रदर्शनों के बीच मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिना किसी का नाम लिए बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा दलित समाज को कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की सीख दी थी. उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में निचली अदालत से न्याय नहीं मिलता है तो संविधान के तहत उच्च अदालतों और सर्वोच्च न्यायालय का रास्ता खुला है.

मायावती ने कहा कि मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज, हरदोई और देश के अन्य हिस्सों की तरह बार-बार सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना समाधान नहीं है. उनका कहना था कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए पीड़ित परिवारों और समाज के लोगों को भड़काकर सड़क पर उतारते हैं, जिससे हिंसा, हंगामा और जाम जैसी स्थितियां पैदा होती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में ऐसे संगठन और उनके नेता घटनास्थल पर पहुंचकर केवल "मगरमच्छ के आंसू" बहाते हैं और अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं, जबकि इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता बल्कि उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं.

चंद्रशेखर आजाद का पलटवार- 'सम्मान है, लेकिन दिल को ठेस पहुंची'

मायावती के बयान के कुछ ही देर बाद चंद्रशेखर आजाद ने भी तीखा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि वह हमेशा मायावती का सम्मान करते हैं और आगे भी करेंगे, लेकिन उनके बयान से उन्हें व्यक्तिगत रूप से ठेस पहुंची है.

चंद्रशेखर ने कहा कि उनके कार्यकर्ता अपनी जान जोखिम में डालकर आंदोलन कर रहे हैं, पुलिस की कार्रवाई झेल रहे हैं, हिरासत में लिए जा रहे हैं और अपने पैसे से संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे लोगों को "मगरमच्छ के आंसू बहाने वाला" कहना उचित नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी दलित बेटी के साथ अत्याचार हो, उसकी हत्या कर दी जाए, उस पर तेजाब डाला जाए या उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाए, तो क्या समाज केवल वर्षों तक अदालतों के फैसले का इंतजार करता रहे?

उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई सड़क पर भी लड़ी जाएगी और कानूनी रूप से भी. उनके मुताबिक समाज खुद तय करेगा कि वास्तव में कौन उसके अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और किसका समाज से केवल वोट का रिश्ता है. चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक नेता उनकी गाड़ियों और संसाधनों पर सवाल उठाते हैं, जबकि आंदोलन उनके समर्थकों की मेहनत और सहयोग से चल रहा है, किसी राजनीतिक दल के पैसे से नहीं.

क्या है पूरा ललिता गौतम हत्याकांड?

पूरा मामला मेरठ के टीपी नगर थाना क्षेत्र का है. मई महीने में बीए की छात्रा ललिता गौतम परीक्षा देने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं. परिजनों ने पहले रिश्तेदारों और परिचितों के यहां उनकी तलाश की. कोई जानकारी न मिलने पर पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई. उसी समय परिवार ने अंकुश नाम के युवक पर शक जताया, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी.

अगले ही दिन मामले में बड़ा मोड़ आया, जब रोहटा थाना क्षेत्र के उपसिया गांव के पास गन्ने के खेत में एक युवती का शव मिला. पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और पहचान के बाद पुष्टि हुई कि शव ललिता गौतम का ही है. बेटी की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. परिजनों ने हत्या के साथ गंभीर आरोप लगाते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की.

प्रदर्शन, तनाव और आरोपी की गिरफ्तारी

घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और मामला तेजी से राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दा बन गया. भीम आर्मी समेत कई संगठनों ने प्रदर्शन किए. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी, जिसके चलते अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा.

जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अंकुश नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके और ललिता गौतम के बीच प्रेम संबंध थे. घटना वाले दिन दोनों साथ थे. आरोपी का दावा है कि ललिता के मोबाइल में दूसरे युवकों से बातचीत देखने के बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से में उसने उसकी हत्या कर दी.

एसएसपी बोले- जांच सही दिशा में थी, बाद में माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का कहना है कि मामले की जांच शुरुआत से ही सही दिशा में चल रही थी. उनके मुताबिक पीड़ित परिवार भी पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट था, लेकिन बाद में कुछ उपद्रवी तत्वों की एंट्री हुई, जिन्होंने पूरे मामले का माहौल बिगाड़ने और तनाव बढ़ाने की कोशिश की.

सड़क बनाम अदालत की लड़ाई पर छिड़ी बहस

ललिता गौतम हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने दलित राजनीति के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को भी सामने ला दिया है. एक तरफ मायावती संविधान और न्यायिक प्रक्रिया के तहत संघर्ष की बात कर रही हैं, तो दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि जब तक पीड़ितों की आवाज सड़क पर नहीं उठेगी, तब तक न्याय की लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी. ऐसे में यह मामला कानून और व्यवस्था के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है.