6 अप्रैल की दोपहर दिल्ली विधानसभा में उस वक्त अफरातफरी मच गई जब यूपी नंबर की एक कार अचानक सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए अंदर जा घुसी. मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया. जांच में आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के थाना सेरामऊ उत्तरी स्थित सिंहपुर गांव के निवासी सर्वजीत सिंह के रूप में हुई है. घटना की जानकारी मिलते ही यूपी पुलिस और एसओजी (SOG) की टीमें पीलीभीत में आरोपी के घर पहुंचकर परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही हैं.
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परिजनों का दावा- भांजे के लापता होने से विक्षुप्त था सर्वजीत
यूपी Tak की टीम ने जब आरोपी के भाई अवतार सिंह से बात की तो उन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए. परिजनों का कहना है कि सर्वजीत का भांजा पिछले कई दिनों से लापता है, जिसकी तलाश में वह काफी समय से भटक रहा था. भाई के मुताबिक, सर्वजीत की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसका शाहजहांपुर से इलाज भी चल रहा है. वह सरकार से मदद न मिलने की वजह से नाराज था और अक्सर कहता था कि 'वह प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर अपना संदेश देकर आएगा कि उसकी कोई मदद नहीं कर रहा है.' परिवार का मानना है कि भांजे के न मिलने के दुख और मानसिक तनाव के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया.
पीलीभीत से दिल्ली तक पुलिस अलर्ट, साजिश के एंगल से भी जांच जारी
इस सुरक्षा चूक के बाद दिल्ली और पीलीभीत पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है. पीलीभीत पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली असेंबली में हुए सिक्योरिटी ब्रीच के संबंध में आवश्यक जानकारियां जुटाई जा रही हैं. हालांकि परिवार इसे मानसिक बीमारी और व्यक्तिगत दुख से जोड़कर देख रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह वाकई सिर्फ पीएम मोदी से मिलने की एक हताशा भरी कोशिश थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश या बड़ी घटना को अंजाम देने की मंशा छिपी थी.
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