राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस की FIR कॉपी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा...ये क्या लिख डाला?

UP News: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में FIR कॉपी सामने आने के बाद कई गंभीर खुलासे हुए हैं. SIT जांच के आधार पर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

यूपी तक

• 04:57 PM • 26 Jun 2026

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UP News: अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है. इस केस में नामजद सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अब इस मामले से जुड़ी एफआईआर कॉपी सामने आने के बाद कई गंभीर खुलासे हुए हैं, जिनसे पूरे प्रकरण की गहराई और जांच की दिशा स्पष्ट होती दिखाई दे रही है.

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एफआईआर कैसे दर्ज हुई और क्या लिखा है?

यह एफआईआर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई थी. शिकायत के आधार पर पुलिस को तहरीर दी गई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई.

एफआईआर में लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट, मौखिक, अभिलेखीय और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर यह सामने आया कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में लगे कुछ कर्मचारियों ने मिलकर धनराशि की चोरी, गबन और आपराधिक दुर्विनियोग किया. इसमें यह भी कहा गया है कि यह पूरा कार्य सुनियोजित तरीके से किया गया.

कौन-कौन आरोपी और क्या आरोप?

एफआईआर में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है. इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा सहित अन्य लोग शामिल हैं.

इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर षड्यंत्र रचकर मंदिर में आने वाले चढ़ावे की धनराशि की गिनती प्रक्रिया में गड़बड़ी की और चोरी व गबन जैसे गंभीर अपराध किए.

जांच और SIT रिपोर्ट में क्या सामने आया?

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई है. रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, स्टाफ की लापरवाही, कैश गिनती प्रक्रिया और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. जांच में यह भी संकेत मिला कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं.

गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

इस मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है. जांच एजेंसियां अब आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क और संभावित साजिश का पता लगाया जा सके.

राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

एफआईआर में ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम न होने को लेकर सवाल भी उठे हैं. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि कुछ बड़े नामों को बचाया जा रहा है. इसी बीच ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने मामले को और गंभीर बना दिया है. अब यह पूरा मामला न केवल जांच का विषय है, बल्कि आस्था और विश्वास से भी जुड़ गया है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.