सुप्रीम कोर्ट में प्रबल प्रताप से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने खुद को पिटीशनर बताते हुए पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इसी दौरान उनका व्यवहार और जजों को संबोधित करने का तरीका विवादों में आ गया. बताया जा रहा है कि उन्होंने टूटी-फूटी अंग्रेजी में अदालत को संबोधित किया और जजों के लिए असामान्य शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने जजों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ तक कहा और सीजीआई को लेकर भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. इसके बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
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सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप कुछ दस्तावेज लेकर कोर्ट पहुंचे थे, जिन्हें उन्होंने पढ़ने के बाद हवा में उड़ा दिया. उनके इस व्यवहार के बाद उन्हें अदालत से बाहर जाने को कहा गया. कोर्ट से बाहर निकलने के बाद भी उन्होंने कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद जजों ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया. वहीं, उनकी याचिका को अंत में खारिज कर दिया गया. इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आचरण और मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है.
यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की घटना बेहद दुर्लभ मानी जाती है. प्रबल प्रताप द्वारा लखनऊ पुलिस कमिश्नर के खिलाफ उठाए गए मुद्दे और अदालत में उनके व्यवहार ने लोगों का ध्यान खींचा है. हालांकि, उनकी सटीक पहचान को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. इस पूरे विवादित घटनाक्रम और वायरल वीडियो ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि अदालत जैसे संवैधानिक मंचों पर लोगों के व्यवहार और भाषा की सीमाएं क्या होनी चाहिए.
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