अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला इन दिनों चर्चा में है. इस मामले की जांच के लिए SIT की तीन अधिकारियों की टीम अयोध्या पहुंच चुकी है और पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है. जांच के केंद्र में चंपत राय और उनके करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव (राम शंकर यादव) हैं. टिन्नू यादव का ड्राइवर से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट में एक अहम पद तक पहुंचने का सफर भी सवालों के घेरे में है और यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.
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जानकारी के अनुसार टिन्नू यादव गरीबी से निकलकर धीरे-धीरे विश्व हिंदू परिषद और फिर राम मंदिर ट्रस्ट में महत्वपूर्ण भूमिका तक पहुंचे. वे मंदिर परिसर में चढ़ावे और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े बैंकिंग कार्यों की जिम्मेदारी संभालते थे. बताया जाता है कि लगभग 14 दान पेटियां थीं, जिनसे रोजाना करोड़ों रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता था. इसी चढ़ावे और बैंकिंग गतिविधियों से जुड़ी गड़बड़ी और चोरी के आरोपों की जांच अब SIT द्वारा की जा रही है.
वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और पड़ोसियों का कहना है कि टिन्नू यादव एक सामान्य और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले व्यक्ति हैं और उनकी संपत्ति को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें कई तरह की गलतफहमियां भी हो सकती हैं. उन्हें एक मददगार और नेकदिल इंसान के रूप में भी बताया जाता है. फिलहाल SIT की जांच जारी है और अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है. इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं, जहां विपक्ष सवाल उठा रहा है, जबकि ट्रस्ट अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है.
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